Lucknow में सार्वजनिक उपक्रमों के संरक्षण पर चर्चा, ‘जय हिंद संवाद’ के तहत जुटे कई दिग्गज
Lucknow: राजधानी के यूपी प्रेस क्लब में 16 जून 2026 को सार्वजनिक उपक्रमों के योगदान और उनके संरक्षण को लेकर एक विचार गोष्ठी हुई। यह कार्यक्रम ‘जय हिंद संवाद’ नाम की एक विमर्श श्रृंखला का हिस्सा था, जिसका मकसद
Lucknow: राजधानी के यूपी प्रेस क्लब में 16 जून 2026 को सार्वजनिक उपक्रमों के योगदान और उनके संरक्षण को लेकर एक विचार गोष्ठी हुई। यह कार्यक्रम ‘जय हिंद संवाद’ नाम की एक विमर्श श्रृंखला का हिस्सा था, जिसका मकसद आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले जनहित के मुद्दों पर गहराई से चर्चा करना है।
इस गोष्ठी में अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया और सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर अपनी चिंता जताई। लखनऊ नगर निगम ठेकेदार संगठन के नेता फरहत कासिम ने कहा कि बिजली, पानी और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाओं को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश हो रही है, जिसे रोकने में प्रशासन और न्यायपालिका नाकाम रही है। वहीं, पौनी जनकल्याण महासभा के अध्यक्ष एस.एम. विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद से कोई नया सरकारी उपक्रम नहीं बना और मुनाफे वाली कंपनियों को घाटे में दिखाकर बेचा जा रहा है।
चर्चा के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे, जिन्हें नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| वक्ता | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| विद्या गौतम (कांग्रेस महिला दलित प्रकोष्ठ) | कांग्रेस शासन के दौरान शुरू हुए सार्वजनिक उपक्रमों के योगदान पर बात की। |
| अम्मार जाफरी (आयुष फार्मासिस्ट संघ) | स्वास्थ्य जैसे जन-कल्याणकारी क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को जरूरी बताया। |
| मोहनीश त्रिवेदी (भाजपा नेता) | BSNL और बिजली विभाग में भ्रष्टाचार को निजीकरण की मुख्य वजह बताया। |
| अविनाश चंद्र जैन (समाजसेवी) | रेलवे में बुजुर्गों की यात्रा छूट खत्म करने के फैसले को गलत बताया। |
| राशिद जमील खान (पीपुल्स जन पार्टी) | मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को संवैधानिक नीतियों के खिलाफ बताया। |
| जी.एम. सिंह (राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद) | आयुष्मान योजना को बड़ा घोटाला बताते हुए निजी अस्पतालों को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया। |
| पी.सी. कुरिल (ट्रेड यूनियन नेता) | भारत की प्रगति के लिए शुरुआती नेतृत्व के आधार को महत्वपूर्ण बताया। |
इस पूरी चर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि कैसे सार्वजनिक उपक्रम आम जनता के लिए मददगार होते हैं और उन्हें बचाने की जरूरत क्यों है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी सेवाओं का नियंत्रण सरकार के पास रहना चाहिए ताकि आम आदमी को सस्ती और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।