UP : लखनऊ के सरोजनीनगर में स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में पुलिसकर्मियों का एक खास प्रशिक्षण कोर्स पूरा हो गया है। 45 दिनों तक चले इस क्राइम सीन मैनेजमेंट ट्रेनिंग के चौथे बैच का समापन
UP : लखनऊ के सरोजनीनगर में स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में पुलिसकर्मियों का एक खास प्रशिक्षण कोर्स पूरा हो गया है। 45 दिनों तक चले इस क्राइम सीन मैनेजमेंट ट्रेनिंग के चौथे बैच का समापन शुक्रवार, 5 जून 2026 को हुआ। इस प्रोग्राम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों और कमिश्नरेट से आए 98 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया, जिनमें आरक्षी से लेकर उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल थे।
इस ट्रेनिंग में पुलिसकर्मियों ने क्या सीखा
इस कोर्स का मकसद पुलिसिंग को आधुनिक बनाना और अपराध की जांच में विज्ञान का इस्तेमाल बढ़ाना है। ट्रेनिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने, साइबर ट्रैकिंग और फॉरेंसिक एनालिसिस जैसी नई तकनीकों के बारे में बताया गया। इसके अलावा उन्हें वैज्ञानिक सैंपलिंग और साइबर सुरक्षा के लेटेस्ट विषयों की भी गहन जानकारी दी गई ताकि वे घटनास्थल से सटीक सबूत जुटा सकें।
यूपी पुलिस को हाई-टेक बनाने का क्या है प्लान
उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल के तहत पूरे प्रदेश में 500 ‘क्राइम सीन एक्सपर्ट’ तैयार किए जा रहे हैं। एडीजी तकनीकी सेवाएं नवीन अरोरा ने बताया कि घटनास्थल पर एक छोटी सी चूक भी केस को कमजोर कर सकती है, इसलिए ग्लव्स, मास्क और हेयर कवर जैसी किट का इस्तेमाल जरूरी है। आईजी राजीव मल्होत्रा ने भी अधिकारियों से कहा कि वे इस ट्रेनिंग से मिले ज्ञान का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर करें ताकि अपराधियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।
अब आगे क्या होगा
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ये 98 पुलिसकर्मी अब अपने-अपने जिलों में वापस जाएंगे। वहां वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में वर्कशॉप करेंगे और दूसरे पुलिसकर्मियों को भी यह सब सिखाएंगे। इससे पूरे उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक पुलिसिंग का एक मजबूत नेटवर्क तैयार होगा, जिससे आम जनता को बेहतर और वैज्ञानिक जांच का लाभ मिलेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्राइम सीन मैनेजमेंट ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य यूपी पुलिस को हाई-टेक बनाना और वैज्ञानिक जांच को मजबूत करना है। सरकार का लक्ष्य कुल 500 क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार करना है ताकि सबूतों के संकलन में गलती न हो और अपराधी आसानी से पकड़े जाएं।
इस ट्रेनिंग में किन तकनीकों पर जोर दिया गया?
ट्रेनिंग में डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, साइबर ट्रैकिंग, वैज्ञानिक सैंपलिंग और फॉरेंसिक विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के विषयों को शामिल किया गया।