Lucknow University में छात्रों का हल्लाबोल, 18 दिन बाद महापंचायत बुलाकर दी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी
Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय में पिछले 18 दिनों से चल रहा छात्रों का धरना अब और उग्र हो गया है। 19 जून को गेट-1 पर सैकड़ों छात्रों ने इकट्ठा होकर ‘छात्र महापंचायत’ बुलाई। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में पोस्टर और
Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय में पिछले 18 दिनों से चल रहा छात्रों का धरना अब और उग्र हो गया है। 19 जून को गेट-1 पर सैकड़ों छात्रों ने इकट्ठा होकर ‘छात्र महापंचायत’ बुलाई। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में पोस्टर और स्लोगन लेकर पहुंचे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों ने साफ कह दिया है कि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी।
यह पूरा विवाद फीस बढ़ोतरी और प्रशासन के सख्त रवैये को लेकर है। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने फीस में 42% की भारी बढ़ोतरी की है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कुलपति जयप्रकाश सैनी पर आरोप लगाया कि वे उनसे नहीं मिल रहे हैं और उनकी समस्याओं को अनसुना कर रहे हैं।
मामला तब और बिगड़ गया जब प्रशासन ने विरोध कर रहे छात्रों पर कार्रवाई की। यूनिवर्सिटी ने 5 छात्रों को निलंबित किया और 8 के खिलाफ मामला दर्ज किया। साथ ही तीन छात्र नेताओं – प्रेम प्रकाश, प्रिंस प्रकाश और हर्षित शुक्ला को यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया गया है। प्रशासन ने फिलहाल इन निष्कासित छात्रों को वापस लेने से इनकार कर दिया है।
इस विरोध प्रदर्शन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। समाजवादी पार्टी के सांसदों, विधायकों और छात्रसभा के नेताओं ने इसे जायज बताया है। वहीं कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भी छात्रों से मुलाकात की और प्रशासन के दमनकारी व्यवहार की निंदा की। आइसा और एनएसयूआई जैसे संगठनों ने भी इस लड़ाई में साथ दिया है।
छात्रों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- 42% फीस वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए।
- निष्कासित छात्र नेताओं की बहाली हो।
- यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार की जांच की जाए।
- ड्रेस कोड के नाम पर छात्रों का उत्पीड़न बंद हो।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।