Lucknow University में फीस वृद्धि के खिलाफ 25वें दिन भी धरना, छात्रों ने मांगा निष्कासित साथियों का साथ

Lucknow: लखनऊ यूनिवर्सिटी (लविवि) में फीस बढ़ोतरी और छात्रों को यूनिवर्सिटी से निकालने के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन 26 जून 2026 को 25वें दिन भी जारी रहा। छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और यूनिवर्सिटी प्रशासन के

Lucknow: लखनऊ यूनिवर्सिटी (लविवि) में फीस बढ़ोतरी और छात्रों को यूनिवर्सिटी से निकालने के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन 26 जून 2026 को 25वें दिन भी जारी रहा। छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इस प्रदर्शन में कई राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है।

छात्रों का मुख्य विरोध कुलपति जय प्रकाश सैनी के प्रशासन द्वारा की गई फीस वृद्धि और कुछ छात्रों को यूनिवर्सिटी से निकाले जाने के खिलाफ है। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि फीस में की गई बढ़ोतरी को वापस लिया जाए और जिन छात्रों को निकाला गया है, उन्हें फिर से प्रवेश दिया जाए। इसके अलावा, एम.ए. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में अतिरिक्त फीस लेने, सेल्फ फाइनेंस कोर्स की सीटों में कटौती और यूनिवर्सिटी में कथित भ्रष्टाचार और शैक्षणिक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

इस आंदोलन में निष्कासित छात्र प्रेम प्रकाश, प्रिंस प्रकाश और हर्षित शुक्ला जैसे छात्र नेता अगुवाई कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रदर्शन में एक नया मोड़ आया जब अस्पताल से छुट्टी पाकर छात्र नेता प्रेम प्रकाश वापस धरना स्थल पर पहुंचे। बता दें कि 24 जून को उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके वापस आने से अन्य प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ा है। छात्रों ने यह आरोप भी लगाया कि जब प्रेम प्रकाश की तबीयत खराब हुई, तब यूनिवर्सिटी की एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी और उन्हें समय पर इलाज मिलने में देरी हुई।

इस प्रदर्शन को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अपना दल (कामेरावादी) का समर्थन मिल रहा है। समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश महासचिव अवनीश कुमार यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इमरान, और कांग्रेस नेता विश्वविजय सिंह समेत कई बड़े नेताओं ने छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई है। प्रेम प्रकाश ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे इस अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब तक प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत की कोई पहल नहीं की है।