UP : लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक पर छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा तीन छात्रों को निष्कासित करने और कुछ पर जुर्माना लगाने के बाद शुरू हुआ। छात्र प्रशासन
UP : लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक पर छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा तीन छात्रों को निष्कासित करने और कुछ पर जुर्माना लगाने के बाद शुरू हुआ। छात्र प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत बता रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
छात्रों के निष्कासन और धरने की वजह क्या है?
यह पूरा मामला 28 अप्रैल को कुलपति कार्यालय के बाहर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। इस घटना की जांच Proctorial Board ने की थी, जिसने 21 मई को अपनी रिपोर्ट सौंपी। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी के आदेश पर एमए हिंदी के प्रेम प्रकाश यादव, एमए लोक प्रशासन के शशि प्रकाश और एलएलबी के हर्षित शुक्ला को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया है। इन तीनों छात्रों का परिसर में प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है और भविष्य में इन्हें किसी भी कोर्स में एडमिशन नहीं मिलेगा।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
- तीनों छात्र नेताओं का निष्कासन तुरंत वापस लिया जाए।
- निलंबन और जुर्माने की कार्रवाई को रद्द किया जाए।
- यूनिवर्सिटी में बढ़ाई गई फीस को वापस लिया जाए।
- छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू किए जाएं।
- परिसर से पुलिस बल को हटाया जाए और धरना देने के लिए स्थायी जगह दी जाए।
प्रशासन का क्या कहना है और क्या बदलाव हुए हैं?
देर रात तक प्रशासन की तरफ से छात्रों से बात करने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। वहीं, कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने बताया कि उनकी प्राथमिकता विधि शिक्षा को आधुनिक बनाना है। उन्होंने एलएलबी कोर्स में NEP 2020 लागू करने की बात कही है, जिसमें अब मूल्यांकन के लिए 75:25 का फॉर्मूला और 40% पासिंग मार्क्स का नियम रहेगा। दूसरी तरफ, महेंद्र यादव और अभिषेक श्रीवास्तव समेत कई छात्र इस कार्रवाई के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ विश्वविद्यालय से किन छात्रों को निकाला गया है?
यूनिवर्सिटी ने प्रेम प्रकाश यादव (एमए हिंदी), शशि प्रकाश (एमए लोक प्रशासन) और हर्षित शुक्ला (एलएलबी) को निष्कासित किया है।
छात्रों के प्रदर्शन की मुख्य मांग क्या है?
छात्रों की मुख्य मांग निष्कासित छात्र नेताओं की वापसी, फीस वृद्धि को रद्द करना और छात्रसंघ चुनाव बहाल करना है।