UP: लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रों के निष्कासन के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन 6 जून 2026 को पांचवें दिन भी जारी रहा। निष्कासित छात्रों ने 2 जून से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जबकि
UP: लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रों के निष्कासन के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन 6 जून 2026 को पांचवें दिन भी जारी रहा। निष्कासित छात्रों ने 2 जून से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जबकि फीस वृद्धि का विरोध अप्रैल महीने से ही चल रहा है। इस मामले में अब राजनीतिक दलों ने भी अपनी एंट्री कर ली है।
छात्रों की मुख्य मांगें और विवाद की वजह क्या है
प्रदर्शनकारी छात्र मुख्य रूप से तीन छात्रों—प्रेम प्रकाश यादव, शशि प्रकाश और हर्षित शुक्ला के निष्कासन आदेश को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इन छात्रों को 28 अप्रैल को कुलपति कार्यालय में हुई एक घटना के बाद निष्कासित किया गया था। इसके अलावा छात्र फीस वृद्धि की निष्पक्ष जांच, एफआईआर वापस लेने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष और फीस वृद्धि का तर्क
कुलपति ने अप्रैल 2026 में स्पष्ट किया था कि फीस में बढ़ोतरी सामान्य नहीं है, बल्कि यह अतिरिक्त सीटों और नए कोर्स शुरू करने के लिए की गई है। प्रशासन का कहना है कि 16 साल बाद आवेदन शुल्क में बदलाव किया गया है ताकि डिजिटल बुनियादी ढांचे और अकादमिक संसाधनों की लागत को पूरा किया जा सके। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि प्रशासन बातचीत करने के बजाय असंतोष को दबाने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक दलों और अन्य कॉलेजों का समर्थन
6 जून को अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद (सपा) और पूर्व सांसद पीएल पुनिया (कांग्रेस) ने धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने दंडात्मक कार्रवाई के बजाय बातचीत से मामला सुलझाने की बात कही। इस आंदोलन में लखनऊ के अन्य कॉलेजों जैसे जय नारायण पीजी कॉलेज, डीएवी कॉलेज, सिटी एकेडमी और नेशनल पीजी कॉलेज के छात्र भी शामिल हुए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन क्यों हो रहा है?
यह आंदोलन बढ़ी हुई फीस, विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं और 28 अप्रैल की घटना के बाद तीन छात्रों के निष्कासन के विरोध में हो रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस बढ़ाने का क्या कारण बताया है?
प्रशासन के अनुसार, 16 साल बाद आवेदन शुल्क में संशोधन किया गया है ताकि नए पाठ्यक्रमों, अतिरिक्त सीटों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के खर्च को मैनेज किया जा सके।