Lucknow University में 49वें दिन भी डटे छात्र, प्रॉक्टोरियल बोर्ड के साथ हुई तीखी नोकझोंक
UP/Lucknow : लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 49वें दिन भी जारी रहा। सोमवार सुबह अनशन स्थल पर माहौल तब गरमा गया जब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तीखी बहस हुई। छात्रों का आरोप
UP/Lucknow : लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 49वें दिन भी जारी रहा। सोमवार सुबह अनशन स्थल पर माहौल तब गरमा गया जब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तीखी बहस हुई। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन उन पर प्रदर्शन खत्म करने का दबाव बना रहा है।
यह पूरा मामला 28 अप्रैल 2026 को कुलपति कार्यालय में हुई एक घटना से शुरू हुआ था, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने तीन छात्रों को निष्कासित कर दिया था। निष्कासित छात्रों में एमए हिंदी प्रथम वर्ष के प्रेम प्रकाश यादव, एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन प्रथम वर्ष के शशि प्रकाश और एलएलबी दूसरे सेमेस्टर के हर्षित शुक्ला शामिल हैं। इन छात्रों की बर्खास्तगी के खिलाफ 4 जून 2026 के आसपास से यह अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ था।
छात्रों की मुख्य मांग है कि इन तीनों छात्रों के निष्कासन आदेश को वापस लिया जाए। इसके साथ ही छात्र फीस बढ़ोतरी को वापस लेने और फीस ढांचे में सुधार की मांग भी कर रहे हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि कुलपति ने विलंब शुल्क में बढ़ोतरी की है और उनका कहना है कि छात्रों की शिक्षा उनकी जिम्मेदारी नहीं है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि इतने दिनों से धरने पर होने के बावजूद यूनिवर्सिटी के किसी भी बड़े अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की है और न ही वे प्रदर्शन स्थल पर आए हैं।
इस आंदोलन को पूर्व कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन जैसे लोगों का समर्थन मिल रहा है। भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा और नेशनल ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल ने भी छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता जताई है। डॉ. नीरज जैन ने प्रशासन से अपील की है कि वे बातचीत का रास्ता खोलें ताकि इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों के निष्कासन का कारण अनुशासनहीनता बताया है।