UP: लखनऊ यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया है. प्रोफेसर पर आरोप है कि उन्होंने बीएससी थर्ड ईयर की एक छात्रा को ‘डार्लिंग’ कहकर
UP: लखनऊ यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया है. प्रोफेसर पर आरोप है कि उन्होंने बीएससी थर्ड ईयर की एक छात्रा को ‘डार्लिंग’ कहकर संबोधित किया और परीक्षा का पेपर लीक कराने का प्रलोभन दिया. इस पूरे मामले का एक ऑडियो वायरल होने के बाद यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया था.
प्रोफेसर पर क्या कार्रवाई हुई और क्यों
यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद (Executive Council) ने 19 मई 2026 को एक इमरजेंसी मीटिंग की, जिसमें डॉ. परमजीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला लिया गया. यह कार्रवाई अनुशासन समिति और आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की रिपोर्ट के बाद हुई है. रिपोर्ट में प्रोफेसर के व्यवहार को अनैतिक और गंभीर माना गया है. इसके अलावा, हसनगंज पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और यूपी पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया है.
क्या था पूरा मामला और प्रोफेसर का जवाब
एक वायरल ऑडियो में प्रोफेसर छात्रा को पेपर आउट कराने की बात कह रहे थे और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे. जांच के दौरान डॉ. परमजीत सिंह ने माना कि ऑडियो में आवाज उनकी ही है, लेकिन उन्होंने इसे ‘जुबान फिसलना’ बताया. यूनिवर्सिटी ने इसे केवल जुबान फिसलना नहीं माना और इसे छात्राओं के मानसिक और यौन उत्पीड़न के प्रयास के रूप में देखा है. प्रोफेसर को एक चार्जशीट जारी की गई है और 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है.
अब आगे क्या होगा
कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने साफ किया है कि कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और यूनिवर्सिटी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी. अगर प्रोफेसर 15 दिनों के अंदर संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उन्हें नौकरी से बर्खास्त (Dismissal) किया जा सकता है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि इस तरह के कृत्य से संस्थान की साख और अकादमिक निष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह पर कौन सी कानूनी धाराएं लगी हैं
प्रोफेसर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करना) और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
क्या प्रोफेसर को नौकरी से निकाला जा सकता है
हां, यूनिवर्सिटी ने उन्हें सस्पेंड कर चार्जशीट दी है. यदि वे 15 दिनों में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देते हैं, तो नियमानुसार उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है.