UP : लखनऊ विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के एक सहायक प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर बीएससी फाइनल ईयर की एक छात्रा के साथ अभद्र बातचीत करने और परीक्षा का प
UP : लखनऊ विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के एक सहायक प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर बीएससी फाइनल ईयर की एक छात्रा के साथ अभद्र बातचीत करने और परीक्षा का पेपर लीक करने का लालच देने का आरोप है। छात्रा ने प्रोफेसर की कॉल रिकॉर्ड कर ली थी, जिसके बाद यह पूरा मामला खुला।
प्रोफेसर पर क्या हैं आरोप और कैसे हुई गिरफ्तारी
आरोपी प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह ने 14-15 मई की रात को छात्रा को फोन किया था। वायरल ऑडियो में प्रोफेसर छात्रा से कह रहे हैं कि उनके लिए पेपर आउट करा दिया है। इसके साथ ही उन पर छात्रा पर मिलने का दबाव बनाने और गलत व्यवहार करने के आरोप हैं। परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी ने हसनगंज थाने में FIR दर्ज कराई, जिसके बाद 16 मई को पुलिस ने प्रोफेसर को पकड़ लिया।
यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस की क्या कार्रवाई हुई
कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने इस मामले में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन किया है और 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। यूनिवर्सिटी ने साफ कहा है कि कैंपस में ऐसी गतिविधियों के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस ऑडियो की जांच कर रही है कि वास्तव में पेपर लीक हुआ था या नहीं।
प्रोफेसर का दावा और छात्र संगठनों का विरोध
गिरफ्तारी के बाद डॉ. परमजीत सिंह ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी की आंतरिक राजनीति की वजह से उन्हें फंसाया गया है। दूसरी तरफ, ABVP के कार्यकर्ताओं ने कैंपस में प्रदर्शन किया और आरोपी प्रोफेसर को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की है। लखनऊ यूनिवर्सिटी में पेपर लीक का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले दिसंबर 2019 में भी ऐसा विवाद हुआ था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आरोपी प्रोफेसर कौन हैं और उन पर क्या धाराएं लगी हैं
आरोपी जूलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह हैं। उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और यूपी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अध्यादेश 2024 की धारा 11 और 13(5) के तहत मामला दर्ज हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं
यूनिवर्सिटी ने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) बनाई है और कुलपति ने 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही परीक्षा नियंत्रक ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।