UP: लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि (Law) छात्रों ने परीक्षा मूल्यांकन में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बुधवार को प्रशासनिक भवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। ABVP लखनऊ महानगर के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में सिटी ल
UP: लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि (Law) छात्रों ने परीक्षा मूल्यांकन में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बुधवार को प्रशासनिक भवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। ABVP लखनऊ महानगर के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में सिटी लॉ कॉलेज के सैकड़ों छात्र शामिल हुए। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कॉपी जांचने में भारी लापरवाही की है, जिससे उनके करियर पर बुरा असर पड़ रहा है।
कॉपी मूल्यांकन में क्या हुई गड़बड़ी?
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रथम वर्ष के परिणामों में भारी विसंगतियां हैं। मुख्य शिकायत यह है कि थ्योरी और प्रैक्टिकल का अनुपात 70:30 की जगह 90:10 कर दिया गया। इस वजह से कई छात्रों को अच्छे प्रदर्शन के बावजूद थ्योरी में 90 में से केवल 7 या 8 अंक ही मिले हैं। एबीवीपी की सरिता पांडे ने साफ कहा कि जब तक प्रथम सेमेस्टर का रिजल्ट पूरी तरह सही नहीं हो जाता, छात्र अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
छात्रों की मुख्य मांगें और प्रशासन का आश्वासन
एबीवीपी के प्रांत मंत्री अर्पण कुशवाहा और जुगल किशोर पांडे ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें निम्नलिखित मांगें रखी गईं:
- विधि के विद्यार्थियों के परिणामों की दोबारा जांच कराई जाए।
- मूल्यांकन में लापरवाही बरतने वाले दोषी प्रोफेसरों पर सख्त कार्रवाई हो।
- प्रवेश परीक्षा, फीस और रिजल्ट से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक कमियों का स्थायी समाधान निकाला जाए।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी ने छात्रों की मुख्य मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विसंगतियों को दूर करने के लिए तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की जा रही है। हालांकि, एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा के भीतर समाधान नहीं निकला, तो वे और भी बड़ा आंदोलन करेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ यूनिवर्सिटी के विधि छात्रों ने प्रदर्शन क्यों किया?
छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रथम वर्ष की विधि परीक्षाओं के मूल्यांकन में लापरवाही हुई है और थ्योरी-प्रैक्टिकल के अंकों के अनुपात (90:10) में बदलाव की वजह से उन्हें बहुत कम अंक मिले हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले पर क्या जवाब दिया?
परीक्षा नियंत्रक डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी ने छात्रों की मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि गलतियों को सुधारने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाएगी।