UP: लखनऊ विश्वविद्यालय के लाखों छात्रों के लिए एक अच्छी खबर आई है। यूनिवर्सिटी ने अब सभी विषयों में ‘स्टेप मार्किंग’ की व्यवस्था लागू कर दी है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने यह फैसला लिया है ताकि छात्रों की मेहनत
UP: लखनऊ विश्वविद्यालय के लाखों छात्रों के लिए एक अच्छी खबर आई है। यूनिवर्सिटी ने अब सभी विषयों में ‘स्टेप मार्किंग’ की व्यवस्था लागू कर दी है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने यह फैसला लिया है ताकि छात्रों की मेहनत बेकार न जाए और मूल्यांकन में एकरूपता बनी रहे।
स्टेप मार्किंग से छात्रों को क्या लाभ होगा?
अब तक कई बार ऐसा होता था कि उत्तर गलत होने पर पूरे नंबर काट लिए जाते थे। नई व्यवस्था के बाद, अगर छात्र ने सही स्टेप्स लिखे हैं, तो उसे उसके नंबर मिलेंगे। इससे उन छात्रों को सीधा फायदा होगा जिन्होंने परीक्षा में काफी मेहनत की है। कुलपति ने बताया कि इसका मकसद मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
यूनिवर्सिटी में और क्या बदलाव हुए हैं?
स्टेप मार्किंग के अलावा यूनिवर्सिटी ने पाठ्यक्रम में भी कई सुधार किए हैं। अब विधि (Law) के कोर्स में ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम’ और ‘मानवीय मूल्यों’ जैसे नए पेपर जोड़े जाएंगे। साथ ही, पीएचडी एडमिशन के इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी ताकि चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रहे। पाठ्यक्रम को बेहतर बनाने के लिए अब इसमें इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और पुराने छात्रों की मदद ली जाएगी।
मूल्यांकन प्रणाली में क्या बदलाव आया है?
कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने 29 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया था कि यूनिवर्सिटी पारंपरिक ‘एब्सोल्यूट मार्किंग सिस्टम’ को बदलकर ‘रिलेटिव मार्किंग सिस्टम’ जैसी गतिशील प्रणाली की ओर बढ़ेगी। यह बदलाव छात्रों के प्रदर्शन को बेहतर तरीके से आंकने के लिए किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ विश्वविद्यालय में स्टेप मार्किंग कब से लागू हुई?
लखनऊ विश्वविद्यालय ने 21 मई, 2026 से सभी विषयों में अनिवार्य स्टेप मार्किंग व्यवस्था लागू की है।
पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में क्या नया बदलाव किया गया है?
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब पीएचडी प्रवेश साक्षात्कार (Interview) की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी।