Lucknow में अपनी पहचान साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे ट्रांसजेंडर, आधार और पैन कार्ड बनवाने में आ रही दिक्कत
Lucknow: राजधानी लखनऊ में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग आज भी अपनी पहचान साबित करने के लिए काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। देश में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के लिए कानून बनने और सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसलों के ब
Lucknow: राजधानी लखनऊ में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग आज भी अपनी पहचान साबित करने के लिए काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। देश में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के लिए कानून बनने और सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसलों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदले हैं। आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने में इन्हें अब भी काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
भारत सरकार ने 10 जनवरी 2020 को ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’ लागू किया था। इस कानून का मकसद ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें कानूनी पहचान दिलाना था। इसके तहत उन्हें पहचान प्रमाण पत्र (Certificate of Identity) मिलने का प्रावधान है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
उत्तर प्रदेश सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है। समाज कल्याण मंत्री Asim Arun ने फरवरी 2026 में कहा था कि सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के प्रति संवेदनशील है। राज्य सरकार नेशनल पोर्टल के जरिए पहचान पत्र जारी कर रही है ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। साथ ही, पंजीकृत सदस्यों को Ayushman स्वास्थ्य कार्ड देने की तैयारी भी चल रही है।
मदद के लिए उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण विभाग ने कॉल सेंटर शुरू किए हैं, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्ति ही काम कर रहे हैं। हर जिले और पुलिस स्टेशन में ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल बनाए गए हैं और राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है।
हालांकि, मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान एक नए ‘ट्रांसजेंडर राइट्स बिल, 2026’ पर चर्चा हुई है। इस प्रस्तावित बिल में पहचान के तरीके को बदलने की बात कही गई है। अब तक यह ‘स्व-घोषित पहचान’ (self-perceived gender identity) पर आधारित था, लेकिन नए प्रस्ताव में इसे सरकारी प्रमाणन या मेडिकल और मनोवैज्ञानिक जांच से जोड़ने की बात है। जानकारों का कहना है कि इससे पहचान की प्रक्रिया और ज्यादा कठिन हो सकती है और आम लोगों के लिए बाधाएं बढ़ सकती हैं।
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 23 जून 2026 को भी राज्यों को निर्देश दिए थे कि वे 2019 के कानून और 2020 के नियमों को ठीक से लागू करें, ताकि ट्रांसजेंडर समुदाय को मिलने वाली सुविधाओं में कोई कमी न रहे।