Lucknow की समिट बिल्डिंग में इंटरनेशनल फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 119 लोग हिरासत में, करोड़ों की ठगी
Lucknow: राजधानी के गोमती नगर इलाके में स्थित चर्चित समिट बिल्डिंग में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देश पर साइबर सेल और क्राइम ब्रांच
Lucknow: राजधानी के गोमती नगर इलाके में स्थित चर्चित समिट बिल्डिंग में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देश पर साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की टीम ने यहां छापेमारी की। इस कार्रवाई में पुलिस ने 119 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें बड़ी संख्या में युवतियां भी शामिल हैं।
यह पूरा खेल समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर बने दो ऑफिसों से चल रहा था, जिसे ‘सोलारिस सॉल्यूशन’ (Solaris Solution) के नाम से चलाया जा रहा था। पुलिस ने मौके से 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। आरोपियों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्हें ले जाने के लिए पुलिस को बसें मंगवानी पड़ीं। इस गिरोह ने मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बनाया और उनसे करोड़ों रुपये ठगे। शुरुआती अनुमान के मुताबिक यह ठगी 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की हो सकती है।
जांच में सामने आया कि यह कॉल सेंटर रात के समय काम करता था। ठग लोग विदेशी नागरिकों को अमेज़न जैसी शॉपिंग साइट से रिफंड दिलाने, निवेश के नाम पर लालच देने या ‘डॉलर ऐप’ के जरिए प्रलोभन देने का झांसा देते थे। कुछ मामलों में लोगों को डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर और ई-वॉलेट खराब होने का डर दिखाकर उनसे पैसे ऐंठे जाते थे। पुलिस ने अहमदाबाद के रहने वाले दो ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को भी पकड़ा है, जो फिलहाल गोमती नगर विस्तार में रह रहे थे।
| बरामद सामान | संख्या/विवरण |
|---|---|
| कुल हिरासत में लिए गए लोग | 119 (27-35 युवतियां शामिल) |
| जब्त लैपटॉप | 100 |
| जब्त मोबाइल फोन | 178 |
| मुख्य आरोपी (मैनेजर) | ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार |
| ठगी का अनुमानित मूल्य | 250 करोड़ रुपये से अधिक |
| टारगेट देश | अमेरिका (USA) |
पुलिस को शक है कि इस पूरे नेटवर्क का असली मालिक विदेश में बैठकर इसे कंट्रोल कर रहा था। हिरासत में लिए गए ज्यादातर कर्मचारी पूर्वोत्तर राज्यों के हैं, जिन्हें अमेरिकी लोगों से बात करने के लिए ढाई महीने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती थी। जब्त किए गए लैपटॉप और फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन का पता लगाया जा सके। पुलिस जल्द ही सभी आरोपियों को अदालत में पेश करेगी।