Lucknow में ग्रीष्मकालीन कला कार्यशालाओं का समापन, 400 प्रतिभागियों ने दिखाई अपनी प्रतिभा
Lucknow: राजधानी लखनऊ में बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित ग्रीष्मकालीन कला कार्यशालाओं का समापन हो गया है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की 30 दिनों की ट्रेनिंग के बाद प्रतिभागियों ने संगीत, नृत्य और लोककलाओं की शानदार प
Lucknow: राजधानी लखनऊ में बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित ग्रीष्मकालीन कला कार्यशालाओं का समापन हो गया है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की 30 दिनों की ट्रेनिंग के बाद प्रतिभागियों ने संगीत, नृत्य और लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। गोमती नगर स्थित अकादमी परिसर के संत गाडगे प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम ने दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यशाला प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि इस साल लगभग 400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इस दौरान कलाकारों ने अपनी मेहनत और सीखे हुए हुनर को मंच पर उतारा।
लखनऊ के अन्य संस्थानों में भी कला को बढ़ावा देने के लिए खास आयोजन हुए। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में 26 मई से शुरू हुई कार्यशाला 25 जून तक चलेगी। यहाँ शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत, तबला, सितार और बांसुरी जैसे वाद्य यंत्रों के साथ कथक और भरतनाट्यम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कुलपति प्रो. मांडवी सिंह के अनुसार, यह पहल भारतीय शास्त्रीय संगीत और ललित कलाओं को बचाने और बढ़ाने के लिए की गई है। यहाँ ऑटिस्टिक और दिव्यांग बच्चों के लिए शास्त्रीय गायन की विशेष कक्षाएं भी चलाई जा रही हैं और इस बार कथक के लिए सबसे ज्यादा आवेदन आए हैं।
वहीं, बिरजू महाराज कथक संस्थान की कार्यशाला का समापन 14 जून को कैसरबाग के कलामंडपम प्रेक्षागृह में हुआ। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि 5 साल के बच्चों से लेकर 75 साल के बुजुर्गों तक ने एक साथ मंच साझा किया। कुल 78 विद्यार्थियों ने हनुमान अष्टकम् और राधा-कृष्ण के भावों पर आधारित नृत्य पेश किया। मुख्य आकर्षण भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटिका रही, जिसका निर्देशन डॉ. उपासना दीक्षित ने किया था। इस मौके पर संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर और मुख्य अतिथि सुमोना एस. पाण्डेय मौजूद रहीं।