Lucknow के 1090 चौराहे और मरीन ड्राइव पर स्ट्रीट डॉग्स का आतंक, कई इलाकों में हमले

Lucknow: राजधानी लखनऊ के 1090 चौराहे और मरीन ड्राइव जैसे व्यस्त इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। शहर के लगभग सभी हिस्से इस समय स्ट्रीट डॉग्स के हमलों की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग और राहगीर डरे

Lucknow: राजधानी लखनऊ के 1090 चौराहे और मरीन ड्राइव जैसे व्यस्त इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। शहर के लगभग सभी हिस्से इस समय स्ट्रीट डॉग्स के हमलों की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग और राहगीर डरे हुए हैं। हाल ही में कृष्णानगर इलाके में एक युवक की जान भी इन हमलों की वजह से चली गई।

कुत्तों के हमलों की यह समस्या सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है। मार्च 2026 में लखनऊ के बाहरी इलाके तरोना गांव में एक सात साल की बच्ची की कुत्तों के हमले से मौत हो गई थी। वहीं मई 2026 में चिनहट के गोविंद विहार इलाके में दो आवारा कुत्तों ने एक पांच साल की बच्ची को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। जुलाई 2026 में कृष्णानगर और काकोरी से ऐसी खबरें भी आईं जहां लोगों ने गुस्से में कुत्तों की पिटाई की।

इस समस्या पर लखनऊ नगर निगम (LMC) ने कई नियम लागू किए हैं। अब पालतू कुत्तों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है और सार्वजनिक जगहों पर उन्हें पट्टे (leash) से बांधकर घुमाना जरूरी है। पालतू जानवरों का रजिस्ट्रेशन LMC की वेबसाइट पर करना होगा। साथ ही, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवारा कुत्तों के लिए खास फीडिंग स्पॉट तय करें, जो बच्चों के खेलने की जगह और मुख्य गेट से दूर हों। इन जगहों पर कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी होना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023 के तहत कुत्तों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना सख्त मना है। नगर निगम के एनिमल वेलफेयर ऑफिसर अभिनव वर्मा ने बताया कि टीकाकरण और नसबंदी के अभियान लगातार चल रहे हैं और कुत्तों के लिए एक शेल्टर होम बनाने की प्रक्रिया जारी है। शहर में लागू ‘लखनऊ मॉडल’ के जरिए मार्च 2025 तक करीब 84.3% आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका है, जिसे अब पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।