Lucknow में असलहों की तस्करी करने वाले 4 गिरफ्तार, माफिया बाबू सिंह से जुड़े हैं तार
Lucknow: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राजधानी लखनऊ में अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जो शहर के अलग-अलग इलाकों
Lucknow: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राजधानी लखनऊ में अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जो शहर के अलग-अलग इलाकों में अवैध हथियार सप्लाई करते थे। यह पूरी कार्रवाई गाजीपुर थाना क्षेत्र के समता मूलक चौराहे की ओर जाने वाली तटबंध सड़क पर कल्याण अपार्टमेंट क्रॉसिंग के पास रात करीब 12 बजे की गई।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान संदेश प्रताप सिंह उर्फ राज, विवेक प्रजापति, नितिन कुंडी और प्रिंस गुप्ता उर्फ सल्लू भाई के रूप में हुई है। जांच में पता चला कि यह गैंग माफिया बाबू सिंह के संरक्षण में काम कर रहा था। गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्हें ये अवैध हथियार और कारतूस गोरखपुर के अभिषेक उर्फ अभी नाम के व्यक्ति से मिलते थे।
एसटीएफ इंस्पेक्टर दिलीप कुमार तिवारी ने बताया कि यह गिरफ्तारी एक गुप्त सूचना के आधार पर हुई। वहीं एडिशनल एसपी एसटीएफ अमित नगर ने पुष्टि की कि गाजीपुर थाने में आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। पकड़े गए आरोपियों में संदेश प्रताप सिंह एक रियल एस्टेट कंपनी ‘Lord Vision Infra Development Private Limited’ में पार्टनर भी है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से काफी सामान बरामद किया है, जिसकी लिस्ट नीचे दी गई है:
| बरामद सामान | मात्रा/विवरण |
|---|---|
| सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल (.32 बोर) | 2 नग |
| मैगजीन | 4 नग |
| जिंदा कारतूस | 50 नग |
| खाली कारतूस | 7 नग |
| कार (Honda City) | 1 नग |
| मोबाइल फोन | 5 नग |
| नकद राशि | 2,420 रुपये |
पूछताछ में सामने आया कि इस गैंग का मास्टरमाइंड नितिन कुंडी पहले सिंथेटिक ड्रग्स और गांजे की तस्करी करता था। करीब दो साल पहले एक पुलिस एनकाउंटर में गोली लगने के बाद उसने हथियारों के धंधे में कदम रखा ताकि वह अपने दुश्मनों से बदला ले सके और वसूली जैसे अपराध कर सके। वहीं संदेश प्रताप सिंह ने कबूल किया कि वह जमीन विवाद, इलाके में दबदबा बनाने और अवैध कब्जे के लिए इन हथियारों का इस्तेमाल करता था।
यह गिरोह हथियारों के धंधे से मोटा मुनाफा कमा रहा था। आरोपी 25 हजार रुपये में पिस्तौल खरीदते थे और उन्हें 50 से 60 हजार रुपये में बेचते थे। इसी तरह कारतूस 300-350 रुपये में खरीदकर 400-500 रुपये में बेचे जाते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।