Lucknow में E20 पेट्रोल के खिलाफ सपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, पुलिस ने हिरासत में लेकर भेजा इको गार्डन

Lucknow: राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर शनिवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में सपा छात्र और युवजन सभा के कार्य

Lucknow: राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर शनिवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में सपा छात्र और युवजन सभा के कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच काफी धक्का-मुक्की हुई।

प्रदर्शनकारियों में लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राज साहनी और सपा युवजन सभा के राम प्रकाश भी मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट की वजह से आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और इससे वाहनों के इंजन को नुकसान पहुँच रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार E20 ईंधन की स्थिति को लेकर पूरी स्पष्टता दे।

दूसरी तरफ, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की और हिरासत में लेते समय उनके कपड़े फाड़ दिए। कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस घसीटते हुए और गोद में उठाकर ले गई।

इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों ने अपनी स्थिति साफ की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इस कार्यक्रम को वापस लेने से इनकार करते हुए इसे वैज्ञानिक रूप से सही बताया है। सरकार का कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और इंजन को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। हालांकि, सरकार ने माना है कि पुराने वाहनों में माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने भी E20 कार्यक्रम का समर्थन किया है और कहा है कि परीक्षण में इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। वहीं, वाणिज्य मंत्रालय ने उन अफवाहों को खारिज किया है जिनमें अमेरिकी इथेनॉल आयात की बात कही गई थी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल का उत्पादन पूरी तरह घरेलू होगा।

वाहनों की स्थिति पर SIAM ने पहले एक पत्र भेजा था जिसमें ईंधन की गुणवत्ता और क्लोराइड स्तर के कारण घटकों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने वह पत्र वापस ले लिया। सरकार फिलहाल व्यापक स्तर पर वाहन खराब होने के आरोपों से इनकार कर रही है।