Lucknow में पहली मोहर्रम पर निकला शाही जरीह जुलूस, सुरक्षा के लिए ड्रोन से हुई निगरानी

Lucknow: लखनऊ के ऐतिहासिक आसिफी इमामबाड़े से बुधवार शाम पहली मोहर्रम के मौके पर शाही जरीह जुलूस निकाला गया। हुसैनाबाद ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क

Lucknow: लखनऊ के ऐतिहासिक आसिफी इमामबाड़े से बुधवार शाम पहली मोहर्रम के मौके पर शाही जरीह जुलूस निकाला गया। हुसैनाबाद ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और पूरे रूट की ड्रोन से निगरानी की गई ताकि शांति बनी रहे।

इस बार के जुलूस में मोम और अभ्रक से बनी जरीह मुख्य आकर्षण रही। मोम की जरीह 22 फीट और अभ्रक की जरीह 17 फीट ऊंची थी, जिसे तैयार करने में करीब 3.10 लाख रुपये का खर्च आया। जुलूस में ताजिया, हजरत अब्बास का अलम, हजरत अली असगर का झूला और काले झंडे लिए बच्चे शामिल थे। शाही परंपरा के मुताबिक इसमें हाथी और ऊंट भी नजर आए और पीएसी बैंड ने मातमी धुनें बजाईं।

सुरक्षा और कानून व्यवस्था को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए थे। बीएनएसएस की धारा-163 के तहत 21 मई से 19 जुलाई तक निषेधाज्ञा लागू है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार जुलूस में किसी भी तरह के हथियार दिखाने पर पूरी तरह रोक रही। साथ ही, दुर्घटनाओं से बचने के लिए ताजियों की ऊंचाई 10 से 12 फीट तक सीमित रखने को कहा गया था। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक पाबंदी लगाई गई थी।

यातायात को सुचारू रखने के लिए डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी ने शाम 7 बजे से डायवर्जन लागू किया था। पक्का पुल चौराहे से बड़ा इमामबाड़ा, रूमी गेट चौराहा और घंटाघर तिराहा से छोटा इमामबाड़ा तक के रास्ते पर वाहनों की एंट्री बंद रही। पुलिस ने सुरक्षा के लिए एक नियम बनाया था कि हर 100 लोगों के समूह में से 20 लोगों के आधार कार्ड प्रशासन के पास जमा करने होंगे और जुलूस के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य था।