Lucknow में निकला 187 साल पुराना शाही जरी का जुलूस, ड्रोन से हो रही निगरानी और ट्रैफिक डायवर्ट
Lucknow: लखनऊ में मोहर्रम के पहले दिन 187 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए शाही जरी का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से बड़े इमामबाड़े से शुरू हुआ, जिसमें शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनकर बड़ी संख्य
Lucknow: लखनऊ में मोहर्रम के पहले दिन 187 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए शाही जरी का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से बड़े इमामबाड़े से शुरू हुआ, जिसमें शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनकर बड़ी संख्या में शामिल हुए। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है।
यह ऐतिहासिक जुलूस 17 जून, 2026 को शाम 6 बजे आसिफी इमामबाड़े से शुरू हुआ और देर रात छोटे इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होगा। इस शाही जरीह का निर्माण वसीम खान और उनके परिवार द्वारा किया गया है, जिसकी ऊंचाई लगभग 22 फुट और वजन करीब 10 क्विंटल है। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त बढ़ा दी है और धार्मिक गुरुओं के साथ पीस कमेटी की बैठकें भी की हैं।
जुलूस के कारण आम जनता के लिए ट्रैफिक में बड़े बदलाव किए गए हैं। लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने शाम 7 बजे से जुलूस खत्म होने तक बड़ा इमामबाड़ा, रूमी गेट, घंटाघर और छोटा इमामबाड़ा के बीच के मुख्य रास्तों को सामान्य वाहनों के लिए बंद कर दिया है। हालांकि, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और स्कूली वाहनों को जरूरत पड़ने पर निकलने की अनुमति दी गई है। किसी भी समस्या के लिए ट्रैफिक कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर 9454405155 और 6389304141 जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोहर्रम के आयोजनों के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। शासन के मुताबिक, किसी भी तरह के हथियारों का प्रदर्शन, तेज संगीत या डीजे के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, ताजिया की ऊंचाई 10 से 12 फीट तक ही सीमित रखी जानी चाहिए। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ में 21 मई से 19 जुलाई, 2026 तक धारा-163 लागू की गई है, जिसके तहत किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए आधिकारिक अनुमति लेना जरूरी है।