UP : लखनऊ के Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (SGPGI) में एक नेक काम हुआ है। मध्य प्रदेश की रहने वाली रानी देवी, जिन्हें डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था, उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया
UP : लखनऊ के Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (SGPGI) में एक नेक काम हुआ है। मध्य प्रदेश की रहने वाली रानी देवी, जिन्हें डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था, उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया। इस फैसले से दो गंभीर मरीजों की जान बच गई है, जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी।
रानी देवी के अंगदान की पूरी कहानी क्या है?
रानी देवी को 20 मार्च 2026 को गंभीर इंट्राक्रानियल हेमरेज के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 23 मार्च को उनकी न्यूरोसर्जरी हुई, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। 27 मार्च को चार सीनियर कंसल्टेंट्स के पैनल ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार की सहमति से 28 मार्च को उनके अंगों को ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया।
SGPGI में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया कैसे हुई?
SGPGI के डायरेक्टर प्रो. आर.के. धीमान ने बताया कि यह इस साल संस्थान द्वारा किया गया दूसरा कैडावरिक ऑर्गन ट्रांसप्लांट है। इस पूरी प्रक्रिया में स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स ने परिवार की काउंसलिंग की। किडनी ट्रांसप्लांट के जरिए उन दो मरीजों को नई जिंदगी मिली है जो ऑर्गन फेल्योर की आखिरी स्टेज पर थे।
केस से जुड़ी मुख्य जानकारियां
| विवरण |
जानकारी |
| मरीज का नाम |
रानी देवी (मध्य प्रदेश) |
| अस्पताल |
SGPGI, लखनऊ |
| भर्ती होने की तारीख |
20 मार्च 2026 |
| ब्रेन डेड घोषित |
27 मार्च 2026 |
| दान किए गए अंग |
किडनी |
| लाभान्वित मरीज |
2 मरीज |