Lucknow में गर्मी की छुट्टियों के बाद खुले स्कूल, छात्रों का हुआ स्वागत; आज से ‘स्कूल चलो अभियान’ भी शुरू

Lucknow: राजधानी लखनऊ में करीब डेढ़ महीने की लंबी गर्मी की छुट्टियों के बाद आज से सभी स्कूल खुल गए हैं। सरकारी, निजी, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में बच्चों की वापसी पर खुशी का माहौल रहा, जहाँ शिक्षकों ने छात्रों

Lucknow: राजधानी लखनऊ में करीब डेढ़ महीने की लंबी गर्मी की छुट्टियों के बाद आज से सभी स्कूल खुल गए हैं। सरकारी, निजी, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में बच्चों की वापसी पर खुशी का माहौल रहा, जहाँ शिक्षकों ने छात्रों का तिलक लगाकर और फूल देकर स्वागत किया। इसी के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘स्कूल चलो अभियान’ के दूसरे चरण की भी शुरुआत कर दी है।

जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि स्कूलों को खोलने से पहले साफ-सफाई, पेयजल और कक्षाओं की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई थीं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए हीट सेफ्टी के कड़े निर्देश दिए गए हैं। अब सभी सरकारी और निजी स्कूलों में सुबह 10:00 बजे तक ही प्रार्थना सभा, व्यायाम और खेलकूद जैसी बाहरी गतिविधियां पूरी करनी होंगी, ताकि बच्चे भीषण गर्मी से बच सकें। माध्यमिक विद्यालयों का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक तय किया गया है, जबकि निजी स्कूल अपने हिसाब से समय रख सकते हैं।

शिक्षा विभाग ने बच्चों की सेहत के लिए स्कूलों में नियमित पानी, ओआरएस और फर्स्ट-एड किट अनिवार्य कर दी है। साथ ही, बरसात के मौसम को देखते हुए जर्जर स्कूल भवनों पर लाल निशान लगाकर उन्हें अनुपयोगी घोषित कर दिया गया है ताकि कोई हादसा न हो। हुसैनगंज के चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राओं को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया गया है और उन्होंने आज से अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को एक जन आंदोलन बनाने की अपील की है। यह अभियान 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य कक्षा 1 से 12 तक के हर बच्चे का नामांकन सुनिश्चित करना और पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को वापस स्कूल लाना है। इस काम में ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की मदद ली जाएगी।

छात्रों की सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग भी एक्शन मोड में है। 1 जुलाई से 31 जुलाई तक स्कूल बसों की विशेष जांच की जाएगी। बसों की बॉडी, फिटनेस, इमरजेंसी एग्जिट और गति सीमा (अधिकतम 40 किमी प्रति घंटा) की जांच होगी। नियमों का पालन न करने वाली बसों का चालान किया जाएगा या उन्हें जब्त किया जा सकता है।