Lucknow में सहारा शहर की 270 एकड़ जमीन का विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, नया विधानभवन बनाने की तैयारी

UP/Lucknow: लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित सहारा शहर की जमीन को लेकर बड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। करीब 270 एकड़ जमीन पर कब्जे और मालिकाना हक को लेकर लखनऊ नगर निगम और सहारा समूह के बीच कानूनी लड़ाई चल रही

UP/Lucknow: लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित सहारा शहर की जमीन को लेकर बड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। करीब 270 एकड़ जमीन पर कब्जे और मालिकाना हक को लेकर लखनऊ नगर निगम और सहारा समूह के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। इस जमीन पर उत्तर प्रदेश सरकार का नया विधानभवन कॉम्प्लेक्स बनाने का प्लान है।

लखनऊ नगर निगम (LMC) का कहना है कि सहारा समूह को 1994 में ग्रीन बेल्ट के लिए 170 एकड़ जमीन दी गई थी। नगर निगम के मुताबिक सहारा ने इस जमीन पर आवासीय और व्यावसायिक निर्माण करके लीज की शर्तों को तोड़ा है। साथ ही लीज की 30 साल की समय सीमा भी पूरी हो चुकी है। इसी आधार पर नगर निगम ने 8 सितंबर 2025 को लीज रद्द कर दी और अक्टूबर 2025 में परिसर को सील कर दिया।

दूसरी तरफ सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी थी। कंपनी का दावा था कि 2017 में एक मध्यस्थता मामले में फैसला उनके पक्ष में आया था और वे लीज रिन्यू कराने के लिए पैसे जमा करने को तैयार हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि सहारा-सेबी विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है, इसलिए यह मामला वहीं जाना चाहिए।

इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। पहले 16 मार्च 2026 को कोर्ट ने सहारा की अपील खारिज की थी, लेकिन बाद में कंपनी ने एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ नगर निगम को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बगची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच फैसला लेगी।

सरकार इस जमीन का बड़ा उपयोग करना चाहती है। योजना के मुताबिक सहारा शहर की 170 एकड़ और LDA की 75 एकड़ समेत कुल 245 एकड़ जमीन पर नया विधानसभा भवन, सचिवालय और मुख्यमंत्री आवास बनाया जाएगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इसके लिए आर्किटेक्ट और कंसल्टेंट चुनने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

सहारा समूह ने पहले इस प्रॉपर्टी को अडानी प्रॉपर्टीज को बेचने की कोशिश भी की थी ताकि निवेशकों का पैसा लौटाया जा सके, लेकिन नगर निगम ने इस कदम का विरोध किया था। वहीं यूपी कैबिनेट ने ग्रीन बेल्ट पर 200 वर्ग मीटर तक के छोटे अवैध निर्माणों को नियमित करने की मंजूरी दी है, लेकिन सहारा जैसे बड़े निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।