Lucknow में गूंजे वेदों के मंत्र, ‘ऋतं वदिष्यामि’ नाटक के जरिए जीवंत हुई भारतीय ज्ञान परंपरा

Lucknow: राजधानी के भारतेन्दु नाट्य अकादमी में रविवार, 26 जुलाई 2026 को एक खास सांस्कृतिक शाम सजी। यहाँ ‘ऋतं वदिष्यामि’ नाम के नाटक का मंचन किया गया, जिसमें वेदों के ज्ञान, संगीत और नृत्य का ऐसा संगम दिखा कि

Lucknow: राजधानी के भारतेन्दु नाट्य अकादमी में रविवार, 26 जुलाई 2026 को एक खास सांस्कृतिक शाम सजी। यहाँ ‘ऋतं वदिष्यामि’ नाम के नाटक का मंचन किया गया, जिसमें वेदों के ज्ञान, संगीत और नृत्य का ऐसा संगम दिखा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस कार्यक्रम के जरिए लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई से रूबरू कराया गया।

इस प्रभावशाली नाटक को वाराणसी की श्री नागरी नाटक मण्डली ने पेश किया। इस आयोजन को सफल बनाने में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज और भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ ने पूरा सहयोग दिया। पूरे नाटक की परिकल्पना और निर्देशन सुमन पाठक ने किया था, जिन्होंने वेदों की मूल अवधारणाओं को बहुत ही सरल तरीके से मंच पर उतारा।

नाटक का सबसे मुख्य संदेश यह था कि ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं है। प्रस्तुति के दौरान वेदों का पाठ, आध्यात्मिक गीत और नृत्य शामिल थे, जिसने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। दर्शकों ने कलाकारों की मेहनत और उनकी कला की जमकर तारीफ की। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ, जिससे पूरे परिसर में शांति और सकारात्मकता का अनुभव हुआ।