UP: लखनऊ की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक और गाड़ियों के दबाव के बीच अब फ्यूल बचाने के लिए एक नया तरीका अपनाया जा रहा है। शहर में रेड सिग्नल पर इंजन बंद करने की आदत से हर महीने लाखों रुपये का ईंधन बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्र
UP: लखनऊ की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक और गाड़ियों के दबाव के बीच अब फ्यूल बचाने के लिए एक नया तरीका अपनाया जा रहा है। शहर में रेड सिग्नल पर इंजन बंद करने की आदत से हर महीने लाखों रुपये का ईंधन बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेश में संसाधनों को बचाने और फ्यूल की खपत कम करने की अपील की है।
रेड लाइट पर इंजन बंद करने से क्या होगा फायदा?
Petroleum Conservation Research Association (PCRA) के मुताबिक, एक गाड़ी रोजाना औसतन 15 से 20 मिनट रेड लाइट पर रुकती है, जिसमें करीब 200 ml फ्यूल बर्बाद होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर रेड लाइट 20 सेकंड से ज्यादा की है, तो इंजन बंद करना गाड़ी की सेहत और जेब दोनों के लिए अच्छा है। केवल दिल्ली में ही इस आदत से साल भर में करीब 250 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
सरकारी अधिकारियों और विभागों के लिए क्या हैं नए नियम?
लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने नगर निगम के अधिकारियों को फालतू सरकारी गाड़ियां वापस करने और अनावश्यक फ्यूल खर्च कम करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। अब अधिकारियों के लिए फिजिकल मीटिंग की जगह वर्चुअल मीटिंग को प्राथमिकता दी जाएगी और कारपूलिंग सिस्टम का ऑडिट भी किया जाएगा।
उद्योगपतियों से फ्यूल बचाने की अपील
इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर दीपक कुमार ने उद्योगपतियों से सरकार के साथ मिलकर फ्यूल बचाने में सहयोग मांगा है। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम, कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल पर जोर दिया है। साथ ही, माल ढुलाई के लिए सड़क के बजाय रेल का इस्तेमाल करने और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने की सलाह दी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रेड लाइट पर इंजन कब बंद करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर रेड लाइट 20 सेकंड से ज्यादा समय के लिए है, तो इंजन बंद करना फ्यूल बचाने और गाड़ी की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
PCRA के अनुसार कितना फ्यूल बच सकता है?
PCRA का अनुमान है कि एक गाड़ी रोजाना रेड लाइट पर करीब 200 ml फ्यूल खर्च करती है। केवल दिल्ली में इस आदत से सालाना लगभग 250 करोड़ रुपये बच सकते हैं।