Lucknow के प्राइवेट अस्पताल ने बिल के लिए रोकी डेडबॉडी, कैंसर मरीज की मौत के बाद मचा बवाल
UP : लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक कैंसर मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने ₹61,000 का बिल बकाया होने की वजह से शव को सौंपने से मना कर दिया। इस घटना के बाद प
UP : लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक कैंसर मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने ₹61,000 का बिल बकाया होने की वजह से शव को सौंपने से मना कर दिया। इस घटना के बाद परिजनों में भारी गुस्सा है और मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।
कौन था मृतक और क्या है पूरा मामला
मृतक की पहचान प्रदीप शर्मा के रूप में हुई है, जो अमेठी जिले के जगदीशपुर स्थित BHEL क्षेत्र के उतेलवा गांव के रहने वाले थे। प्रदीप शर्मा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और लखनऊ के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई, लेकिन अस्पताल ने ₹61,000 का बिल जमा न होने तक डेडबॉडी को रोकने का फैसला किया।
क्या अस्पताल का डेडबॉडी रोकना कानूनी है
कानून के मुताबिक कोई भी अस्पताल बिल बकाया होने की वजह से मरीज के शव को बंधक नहीं बना सकता। अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, मरीजों के अधिकारों के तहत यह पूरी तरह गलत है। इसी तरह के मामलों में पहले भी लखनऊ में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। फरवरी 2023 में अलीगंज के एक अस्पताल में ऐसा ही मामला होने पर यूपी के डिप्टी सीएम ने जांच के आदेश दिए थे और मरीज को छुड़ाया गया था।
अन्य राज्यों में इस पर क्या नियम हैं
भारत के कुछ राज्यों में इस समस्या को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। उदाहरण के लिए, असम सरकार ने जुलाई 2025 में एक बड़ा फैसला लिया था। वहां के नियमों के मुताबिक, प्राइवेट अस्पताल बिल के लिए शव को 2 घंटे से ज्यादा नहीं रोक सकते। अगर कोई अस्पताल ऐसा करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अस्पताल बिल न भरने पर शव रोक सकते हैं?
नहीं, कानूनी तौर पर कोई भी अस्पताल बकाया बिल के कारण मरीज के शव को नहीं रोक सकता। यह मरीज के अधिकारों का उल्लंघन है।
यह घटना लखनऊ में कहाँ की है और मृतक कौन था?
यह घटना लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल की है। मृतक प्रदीप शर्मा अमेठी जिले के जगदीशपुर (BHEL क्षेत्र) के उतेलवा गांव के निवासी थे।