UP : लखनऊ पुलिस ने एक बड़े अभियान के तहत 101 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिए हैं। यह पूरी कार्रवाई पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशों पर की गई। खास बात यह है कि ये फोन सिर्फ लखनऊ ही
UP : लखनऊ पुलिस ने एक बड़े अभियान के तहत 101 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिए हैं। यह पूरी कार्रवाई पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशों पर की गई। खास बात यह है कि ये फोन सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि दूसरे जिलों और अलग-अलग राज्यों से ट्रेस करके वापस लाए गए हैं।
मोबाइल रिकवरी अभियान में किसने की मदद
इस ऑपरेशन को उत्तरी जोन की सर्विलांस सेल और क्राइम टीम ने अंजाम दिया। डीसीपी (उत्तरी) गोपाल कृष्ण चौधरी और एडीसीपी (उत्तरी) ट्विंकल जैन के सुपरविजन में यह काम हुआ। टीम का नेतृत्व उप-निरीक्षक दीपक कुमार ने किया, जिसमें हेड कांस्टेबल नदीम, अवधेश गिरी, अमित कुमार गौतम, संतोष कुमार, राघवेंद्र प्रताप सिंह और विशेष दुहूण ने अहम भूमिका निभाई। बरामद फोन की कुल कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई जा रही है।
कैसे ट्रैक हुए गुम हुए मोबाइल फोन
उत्तरी जोन के अलग-अलग थानों में मोबाइल गुम होने की शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस ने इन शिकायतों को सर्विलांस पर रखा और तकनीकी ट्रैकिंग शुरू की। इसमें CEIR पोर्टल जैसी तकनीकी सहायता का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने फोन के आईएमईआई (IMEI) नंबरों की जांच की और फिर उनके मालिकों से संपर्क कर मालिकाना हक की पुष्टि करने के बाद फोन लौटाए।
मोबाइल गुम होने पर क्या करें
लखनऊ पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि अगर आपका मोबाइल गुम या चोरी हो जाता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल जैसे CEIR पोर्टल पर भी शिकायत करें। समय पर शिकायत करने से तकनीकी ट्रैकिंग आसान हो जाती है और फोन वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस ने कहा है कि बरामदगी का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ पुलिस ने कितने मोबाइल फोन बरामद किए और उनकी कीमत क्या है?
लखनऊ पुलिस ने कुल 101 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मल्टीमीडिया मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 21 लाख रुपये बताई गई है।
गुम हुए मोबाइल को ट्रैक करने के लिए पुलिस ने किस तकनीक का इस्तेमाल किया?
पुलिस ने सर्विलांस सेल की मदद से तकनीकी ट्रैकिंग की और CEIR पोर्टल का उपयोग किया। साथ ही फोन के IMEI नंबरों के जरिए उनकी लोकेशन ट्रेस की गई।