Lucknow पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 3364 बैंक खाते और 1710 मोबाइल नंबर ब्लॉक; साइबर ठगों के जाल को किया ध्वस्त
Lucknow: लखनऊ पुलिस ने साइबर ठगी करने वालों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हजारों बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ब्लॉक कर दिया है ताकि लोगों की मेहनत की कमाई
Lucknow: लखनऊ पुलिस ने साइबर ठगी करने वालों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हजारों बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ब्लॉक कर दिया है ताकि लोगों की मेहनत की कमाई को बचाया जा सके और अपराधियों तक पहुंचा जा सके।
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने बताया कि साइबर अपराधी ठगी की रकम सीधे अपने खाते में नहीं लेते। इसके लिए वे ‘म्यूल अकाउंट’ यानी किराए के खातों का इस्तेमाल करते हैं। ठगी के पैसों को कई अलग-अलग खातों में घुमाया जाता है जिससे असली अपराधी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। पुलिस ने इन खातों को फ्रीज करके पीड़ितों के पैसे बचाने की कोशिश की है।
| विवरण | कुल चिह्नित | ब्लॉक/फ्रीज किए गए |
|---|---|---|
| म्यूल बैंक खाते | 3707 | 3364 |
| संदिग्ध मोबाइल नंबर | 2222 | 1710 |
| संदिग्ध IMEI नंबर | 678 | 599 |
पुलिस की जांच में पता चला है कि गोमतीनगर, गुंडबा और बक्शी का तालाब वाले पूर्वी जोन में सबसे ज्यादा 1425 म्यूल खाते मिले हैं। वहीं दक्षिणी जोन में सबसे अधिक 722 संदिग्ध मोबाइल नंबर पाए गए। 1 जनवरी से 21 जून 2026 के बीच NCRP पोर्टल के जरिए यह कार्रवाई की गई।
पुलिस ने आम लोगों को आगाह किया है कि कॉल पर किसी को भी अपना OTP या बैंक की जानकारी न दें। बिना जांच-परख के कोई भी ऐप डाउनलोड न करें और न ही उनमें पैसे भेजें। अधिकारियों ने साफ किया है कि पुलिस, सीबीआई या कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तार करने या ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की बात नहीं करती है।
डिजिटल अरेस्ट के घोटालों से बचने के लिए 5 अगस्त 2026 को गाइडलाइन्स जारी की गई थीं। इसके मुताबिक, कोई भी इलेक्ट्रॉनिक समन तभी मान्य होगा जब वह एन्क्रिप्टेड हो, कोर्ट की मुहर लगी हो और डिजिटल साइन किया गया हो। व्हाट्सएप या किसी अनौपचारिक तरीके से भेजे गए नोटिस की कोई कानूनी मान्यता नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या अपने नजदीकी साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार अब हर विभाग में नोडल अधिकारी तैनात कर राज्य को साइबर सुरक्षा में नंबर-1 बनाने की कोशिश कर रही है।