UP: लखनऊ पुलिस अब डिजिटल दुनिया के नए और खतरनाक अपराधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है। साइबर फ्रॉड, ब्लॉकचेन और डार्क वेब जैसे मुश्किल विषयों पर पुलिसकर्मियों के लिए एक खास वर्कशॉप आयोजित की गई। इसका मकसद पुल
UP: लखनऊ पुलिस अब डिजिटल दुनिया के नए और खतरनाक अपराधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है। साइबर फ्रॉड, ब्लॉकचेन और डार्क वेब जैसे मुश्किल विषयों पर पुलिसकर्मियों के लिए एक खास वर्कशॉप आयोजित की गई। इसका मकसद पुलिस को इतना सक्षम बनाना है कि वे नए तरीके के ऑनलाइन फ्रॉड को आसानी से पकड़ सकें और आम जनता को ठगी से बचा सकें।
वर्कशॉप में क्या सिखाया गया और कौन शामिल था
यह ट्रेनिंग 4 मई 2026 को विश्वेश्वरैया हॉल में हुई। इसमें साइबर हेल्प डेस्क के इंचार्ज, साइबर सेल के स्टाफ और 2023 बैच के सब-इंस्पेक्टर्स समेत कुल 117 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। एक्सपर्ट अनुज अग्रवाल और दीप दिवाकर ने पुलिस को बताया कि कैसे क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों की हेराफेरी होती है और डार्क वेब का इस्तेमाल अपराधी कैसे करते हैं। ट्रेनिंग में डिजिटल अरेस्ट, सोशल इंजीनियरिंग और साइबर स्टॉकिंग जैसे नए खतरों पर भी चर्चा हुई।
इन बड़े अधिकारियों की देखरेख में हुई ट्रेनिंग
इस पूरे कार्यक्रम को जॉइंट सीपी (क्राइम और मुख्यालय) अपर्णा कुमार, जॉइंट सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) बबलू कुमार और डीसीपी (मुख्यालय) अमित कुमावत के मार्गदर्शन में पूरा किया गया। एसीपी सौम्या पांडे ने वर्कशॉप की कार्यवाही की निगरानी की। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने साफ किया है कि भविष्य में भी इस तरह के ट्रेनिंग प्रोग्राम नियमित रूप से चलते रहेंगे ताकि पुलिस की तकनीकी ताकत बढ़ सके और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
यूपी में साइबर क्राइम की वर्तमान स्थिति
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले तीन सालों से साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। साल 2024 में कुल 11,073 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा यूपीआई फ्रॉड, नकली इन्वेस्टमेंट ऐप, ओटीपी स्कैम और फिशिंग अटैक के मामले सामने आए। हालांकि, जांच के मामले में यूपी का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जहां 54% मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जो कि राष्ट्रीय औसत 31.9% से काफी ज्यादा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ पुलिस की इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य क्या था
इसका मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को ब्लॉकचेन, क्रिप्टोकरेंसी और डार्क वेब जैसी नई तकनीकों की ट्रेनिंग देना था ताकि वे आधुनिक साइबर अपराधों की जांच कर सकें और डिजिटल सबूत जुटा सकें।
यूपी में साइबर क्राइम के क्या आंकड़े सामने आए हैं
साल 2024 में उत्तर प्रदेश में 11,073 साइबर क्राइम केस दर्ज हुए। इनमें ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड सबसे ज्यादा रहे और राज्य ने 54% चार्जशीट रेट के साथ राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया।