UP : लखनऊ में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों द्वारा लुटेरों का गिरोह चलाने का मामला सामने आया है। एक दरोगा और सिपाही मिलकर लोगों को निवेश पर रकम दोगुनी करने का लालच देते थे और फिर उनसे लूटपाट करते थे। पुलिस ने इस मामले में
UP : लखनऊ में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों द्वारा लुटेरों का गिरोह चलाने का मामला सामने आया है। एक दरोगा और सिपाही मिलकर लोगों को निवेश पर रकम दोगुनी करने का लालच देते थे और फिर उनसे लूटपाट करते थे। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
कौन-कौन हुए गिरफ्तार और कौन है फरार
पुलिस ने इस गिरोह से चार लोगों को पकड़ा है। इनमें यूपी पुलिस का सिपाही पूरन सिंह, जो चिनहट की कमता चौकी पर तैनात था, शामिल है। इसके अलावा जावेद हुसैन, आसिफ और प्रवेश त्रिपाठी को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं, सीआरपीएफ का दरोगा जयप्रकाश यादव और उसका साथी आनंद दुबे अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
कैसे करते थे ठगी और लूटपाट
डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि यह गिरोह लोगों को पैसा दोगुना करने का झांसा देकर फंसाता था। पीड़ितों को डराने के लिए आरोपी खुद को पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते थे। एडीसीपी पूर्वी अमोल मुर्कुट के मुताबिक, वारदात के लिए एक ऐसी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था जिसकी नंबर प्लेट फर्जी थी और वह गाड़ी काफी पहले नीलाम हो चुकी थी।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
प्रभाकर सिंह की शिकायत पर 11 जून 2026 को चिनहट कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मदद से सिपाही पूरन सिंह की भूमिका सामने आई, जिसे अब निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 1.25 लाख रुपये नकद और दो कारें बरामद की हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इस गिरोह में पुलिस विभाग के कौन लोग शामिल थे?
इस गिरोह में यूपी पुलिस का सिपाही पूरन सिंह (चिनहट चौकी) और सीआरपीएफ का दरोगा जयप्रकाश यादव शामिल थे। सिपाही पूरन सिंह गिरफ्तार हो चुका है जबकि दरोगा अभी फरार है।
गिरोह लोगों को ठगने के लिए क्या तरीका अपनाता था?
गिरोह के सदस्य लोगों को निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच देते थे और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ितों को धमकाते थे।