Lucknow में साइबर फ्रॉड आरोपियों को छोड़ने के आरोप में 9 पुलिसकर्मियों पर एक्शन, 3 सस्पेंड और 6 लाइन हाजिर

Lucknow: लखनऊ पुलिस ने विभाग के अंदर ही भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। साइबर फ्रॉड के आरोपियों से पैसे लेकर उन्हें छोड़ने के आरोप में 9 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनात

Lucknow: लखनऊ पुलिस ने विभाग के अंदर ही भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। साइबर फ्रॉड के आरोपियों से पैसे लेकर उन्हें छोड़ने के आरोप में 9 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित और लाइन हाजिर कर दिया है।

यह पूरा मामला लखनऊ के समिट बिल्डिंग में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर से जुड़ा है। 1 जुलाई 2026 को पुलिस ने यहाँ छापेमारी की थी, जहाँ अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने के आरोप में 119 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में यह बात सामने आई कि कुछ पुलिसकर्मियों ने पैसे लेकर आरोपियों को राहत दी। जब एक पीड़िता ने याचिका दायर की और 2 अगस्त 2026 को दैनिक जागरण ने इस खबर को प्रमुखता से छापा, तब उच्च अधिकारियों ने गोपनीय जांच के आदेश दिए। जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।

पुलिस उपायुक्त (अपराध) अनिल यादव ने मंगलवार को इस कार्रवाई को पूरा किया। कुल 9 पुलिसकर्मियों में से 3 को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि 6 को लाइन हाजिर किया गया है। लाइन हाजिर होने वालों में दारोगा आदिल और अरविंद के साथ सिपाही जय प्रकाश, आशीष, अविनाश और संतोष गौतम शामिल हैं।

एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान जारी है और अपराधियों का साथ देने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार ने भी इस कार्रवाई की पुष्टि की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और अगर किसी और पुलिसकर्मी का नाम सामने आता है, तो उन पर भी एक्शन होगा।

यह ठगी गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और इसका नेटवर्क अमेरिका तक फैला हुआ था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अंतरराज्यीय जांच भी की, जिसमें कोलकाता से 3 और गुजरात से 1 मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। लखनऊ पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई और गिरफ्तारियों की जानकारी एक प्रेस नोट के जरिए भी साझा की है।