Lucknow में पंचायत सहायकों का महा आंदोलन, नियमितीकरण और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर इको गार्डन में जुटे हजारों लोग
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में सोमवार को पंचायत सहायकों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पंचायत सहायक कल्याण समिति और अन्य संगठनों के बैनर तले प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब 5000 पंच
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में सोमवार को पंचायत सहायकों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पंचायत सहायक कल्याण समिति और अन्य संगठनों के बैनर तले प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब 5000 पंचायत सहायक यहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियमितीकरण और मानदेय में बढ़ोतरी की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल जाएगा।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व पंचायत सहायक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद चाँद और पंचायत सहायक कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवेंद्र प्रताप सिंह ने किया। पंचायत सहायक यूनियन की ब्लॉक अध्यक्ष लवली यादव ने भी सहायकों से इस लड़ाई में साथ आने की अपील की थी। प्रदर्शन के दौरान मौके पर सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरा मामला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
पंचायत सहायकों की मुख्य मांगें उनके भविष्य और आर्थिक स्थिति से जुड़ी हैं। वर्तमान में उन्हें करीब 6,000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जिसे बढ़ाकर 18,000 से 25,000 रुपये करने की मांग की गई है। साथ ही, उन्होंने खुद को ‘ग-श्रेणी’ के राज्य कर्मचारी के रूप में स्थायी करने और सेवानिवृत्ति पेंशन की व्यवस्था करने की मांग रखी है।
| प्रमुख मांगें | विवरण |
|---|---|
| नियमितीकरण | स्थायी कर्मचारी का दर्जा और नियमित सेवा ढांचा |
| मानदेय वृद्धि | 6,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000-25,000 रुपये करना |
| आरक्षण | पंचायतीराज विभाग में 50% आरक्षण और VDO/VPO भर्ती में वरीयता |
| महिला सहायकों के लिए | शादी के बाद ससुराल के पास स्थानांतरण और समायोजन |
| सामाजिक सुरक्षा | पेंशन, चिकित्सा सुविधाएं और समय पर मानदेय भुगतान |
| पदोन्नति | पदोन्नति के लिए एक स्पष्ट नीति का निर्माण |
गौरतलब है कि इससे पहले 5 मई 2026 को पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इन सहायकों की समस्याओं को सुना था और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने ‘समान काम, समान वेतन’ का मुद्दा उठाने का भरोसा दिया था। हालांकि, अब तक कोई ठोस निर्णय न होने के कारण सहायकों ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है।