Lucknow में खेतों में शुरू हुई धान की रोपाई, शारदा नहर में पानी आने से किसानों के चेहरे खिले
Lucknow: राजधानी लखनऊ के खेतों में धान की रोपाई का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। जिन किसानों ने पहले से नर्सरी तैयार कर ली थी, उन्होंने पौधों को खेतों में लगाना शुरू कर दिया है, जबकि बाकी किसान अभी खेतों की जुताई औ
Lucknow: राजधानी लखनऊ के खेतों में धान की रोपाई का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। जिन किसानों ने पहले से नर्सरी तैयार कर ली थी, उन्होंने पौधों को खेतों में लगाना शुरू कर दिया है, जबकि बाकी किसान अभी खेतों की जुताई और तैयारी में जुटे हैं। शारदा नहर में पानी की आवक होने से खेती के कामों में तेजी आई है और किसानों में इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
इसी बीच 25 जून 2026 को लखनऊ में एक अहम बैठक हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डिप्टी सीएम और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के साथ मिलकर खेती और ग्रामीण विकास के लिए एक वैज्ञानिक रोडमैप पर चर्चा की। इस बैठक में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान से निपटने के साथ-साथ खरीफ सीजन की तैयारियों पर बात की गई।
सरकार ने खेती को आधुनिक बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। अब धान की खेती के लिए Direct Seeded Rice (DSR) तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि पानी की बचत हो सके। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) और सूखे को सहने वाले बीजों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। लखनऊ में एक ‘क्लीन प्लांट सेंटर’ भी बनाया जाएगा, जिससे किसानों को बीमारी मुक्त और अच्छी क्वालिटी के पौधे मिलेंगे और उनकी कमाई बढ़ेगी।
सरकार की योजना अब केवल धान और गेहूं तक सीमित न रहकर दालों, तिलहन, मोटे अनाज और बागवानी को बढ़ावा देने की है। लक्ष्य यह है कि 2047 तक कृषि अर्थव्यवस्था को 7.41 ट्रिलियन रुपये से बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपये तक ले जाया जाए। केंद्र सरकार ने यह भरोसा भी दिलाया है कि खाद की कोई कमी नहीं होगी।
कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि धान की बेहतर ग्रोथ के लिए समय पर रोपाई करना जरूरी है। मुकुंद खेड़ा के किसान मलखान सिंह जैसे कई किसान मौसम को देखते हुए इस बार अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे हैं। इससे पहले मई में भीषण गर्मी के कारण नर्सरी लगाने में देरी की सलाह दी गई थी। विशेषज्ञों ने जलभराव वाले इलाकों के लिए ‘जलनिधि’ और ‘स्वर्ण सब-1’ तथा बंजर जमीन के लिए ‘CSR-43’ और ‘नरेंद्र उसर धान-2008’ जैसी किस्मों के इस्तेमाल का सुझाव दिया है।