Lucknow: अब साल भर होगी प्याज की खेती, किसानों की कमाई होगी 5 गुना ज्यादा
Lucknow: लखनऊ के किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब प्याज की खेती सिर्फ एक मौसम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साल भर की जा सकेगी। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक खोज निकाली है जि
Lucknow: लखनऊ के किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब प्याज की खेती सिर्फ एक मौसम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साल भर की जा सकेगी। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक खोज निकाली है जिससे खरीफ और लेट खरीफ के मौसम में भी प्याज की बंपर पैदावार संभव होगी। इससे न केवल किसानों का मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि बाजार में प्याज की कीमतों में होने वाली भारी बढ़ोत्तरी पर भी लगाम लगेगी।
बागवानी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुतनु माजी और उनकी टीम ने आठ साल की मेहनत के बाद यह तकनीक विकसित की है। इस तरीके में अस्थायी संरक्षित ढांचे के तहत उठी हुई क्यारियां बनाई जाती हैं और मिट्टी का खास उपचार किया जाता है। जुलाई के पहले हफ्ते से अगस्त तक बुवाई करने और फिर 40-50 दिन के पौधों की रोपाई करने से अच्छी उपज मिलती है। लखनऊ की क्षारीय मिट्टी के लिए भीमा राज, भीमा शक्ति, एल-883 और एग्रीफाउंड डार्क रेड जैसी किस्में सबसे बेहतर पाई गई हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार इस नई पहल को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक मदद भी दे रही है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत नर्सरी और कोल्ड स्टोरेज पर 75% तक की सब्सिडी मिल रही है। इसके अलावा, खरीफ प्याज की खेती के लिए सरकार 12,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दे रही है। इस साल खरीफ में 10,000 हेक्टेयर में प्याज उगाने का लक्ष्य रखा गया है।
| सुविधा/सहायता | अनुदान/विवरण | |
|---|---|---|
| खरीफ प्याज खेती अनुदान | 12,000 रुपये प्रति हेक्टेयर | |
| हाई-टेक नर्सरी सब्सिडी | 40% तक | |
| छोटी पौधशाला सब्सिडी | 50% तक | |
| कोल्ड स्टोरेज/पैक हाउस | 35% से 50% तक | |
| बफर स्टॉक खरीद दाम | 2,125 रुपये प्रति क्विंटल |
अक्सर देखा गया है कि अक्टूबर से मार्च के बीच बाजार में प्याज की कमी हो जाती है जिससे दाम बढ़ जाते हैं। साल भर उत्पादन होने से यह समस्या दूर होगी। केंद्र सरकार ने भी बफर स्टॉक के लिए खरीद मूल्य 13% बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इसके साथ ही मिर्जापुर, वाराणसी और सोनभद्र जैसे इलाकों में भी किसानों को इस तकनीक के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।