Lucknow के ओमेक्स सोसायटी में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों से की 200 करोड़ की ठगी

Lucknow: राजधानी के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह को पकड़ा है जो लखनऊ में बैठकर अमेरिका के लोगों को अपना शिकार बना रहा था। ओमेक्स आर-2 सोसायटी से संचालित इस नेटवर्क ने पिछले कुछ मह

Lucknow: राजधानी के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह को पकड़ा है जो लखनऊ में बैठकर अमेरिका के लोगों को अपना शिकार बना रहा था। ओमेक्स आर-2 सोसायटी से संचालित इस नेटवर्क ने पिछले कुछ महीनों में करोड़ों रुपये की ठगी की है। उत्तर प्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस गिरोह का पर्दाफाश किया है।

यह पूरी कार्रवाई डीजीपी राजीव कृष्ण के ‘साइबर वज्र’ अभियान के तहत की गई। डीसीपी अपराध अनिल यादव ने बताया कि यह सेटअप किसी मिनी जामताड़ा जैसा था। एडीसीपी क्राइम किरण यादव के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी में 7 से 8 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के मुख्य आरोपी पुनीत वर्मा और देवेंद्र पटेल गुजरात के रहने वाले हैं, जबकि कुछ सदस्य अमेरिका में भी मौजूद हैं।

ठगी का तरीका बहुत शातिर था। ये लोग अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर पर वायरस और मैलवेयर के फर्जी पॉप-अप भेजते थे, जिसमें एक टोल-फ्री नंबर दिया होता था। जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता, तो आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट या फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) का अधिकारी बताते थे। वे पीड़ितों को डराते थे कि उनके बैंक खाते या सोशल सिक्योरिटी नंबर का इस्तेमाल गलत कामों में हुआ है और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी जाती थी। विश्वास जीतने के लिए फर्जी सरकारी दस्तावेज और कोर्ट ऑर्डर भी ई-मेल किए जाते थे। रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर जैसे TeamViewer और UltraViewer के जरिए वे कंप्यूटर का कंट्रोल ले लेते थे और फिर पैसे ऐंठते थे।

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने पिछले 6 से 8 महीनों में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है। एक अमेरिकी महिला से अकेले 70 लाख रुपये लिए गए। ठगी की रकम अमेज़न और वॉलमार्ट के गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए मंगवाई जाती थी। पैसे ट्रांसफर करने के लिए इंडियन बैंक और एसबीआई के म्यूल खातों का इस्तेमाल किया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि पकड़े गए कुछ आरोपी सिर्फ सातवीं से दसवीं पास हैं, जिन्होंने अंग्रेजी संवादों को हिंदी स्क्रिप्ट में रट लिया था ताकि वे अमेरिकी नागरिकों से बात कर सकें।

बरामद सामान संख्या/विवरण
लैपटॉप 8
मोबाइल फोन 9
हेडफोन 9
वाई-फाई राउटर 4
अन्य लैपटॉप चार्जर, माउस, कॉलिंग स्क्रिप्ट और फर्जी दस्तावेज