Lucknow में जलभराव से मिलेगी राहत, अब सेंसर बेस्ड टेक्नोलॉजी बताएगी कहां जमा होगा पानी
Lucknow: लखनऊ के लोगों को अब बारिश के मौसम में सड़कों पर जमा होने वाले पानी की समस्या से निजात मिल सकती है। नगर निगम प्रशासन शहर के उन इलाकों की पहचान करने के लिए सेंसर बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रहा है, जहां अ
Lucknow: लखनऊ के लोगों को अब बारिश के मौसम में सड़कों पर जमा होने वाले पानी की समस्या से निजात मिल सकती है। नगर निगम प्रशासन शहर के उन इलाकों की पहचान करने के लिए सेंसर बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रहा है, जहां अक्सर जलभराव होता है। इस नई तकनीक की मदद से प्रशासन को पहले ही पता चल जाएगा कि किस एरिया में खतरा ज्यादा है, ताकि समय रहते कदम उठाए जा सकें।
नगर निगम प्रशासन इस दिशा में तैयारी कर रहा है ताकि शहर को जलभराव की समस्या से पूरी तरह मुक्त किया जा सके। इस पहल के साथ-साथ शहर में ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है। जून 2026 में लखनऊ नगर निगम ने जलभराव रोकने के लिए 463 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शुरू किए थे। इसमें 300 करोड़ रुपये की अर्बन फ्लड और स्टॉर्म वॉटर स्कीम शामिल है, जिसके तहत नए पंप लगाए जा रहे हैं और नालों की सफाई की जा रही है।
इस अभियान के तहत आशाियाना, एलडीए कॉलोनी, तेलीबाग, मानसरोवर, आलमबाग, कृष्णनगर और रजनीखंड जैसे इलाकों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मानसून से पहले सभी निर्माण और सफाई का काम अच्छी क्वालिटी के साथ पूरा किया जाए।
पानी के मैनेजमेंट के लिए गोमती बैराज को भी डिजिटल और ऑटोमेटेड सिस्टम (SCADA) से जोड़ा जा रहा है। इससे पानी के लेवल की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी और बैराज के गेट्स को ऑटोमैटिक कंट्रोल किया जा सकेगा। इसके अलावा, नगर निगम ने शहर की 1041 किलोमीटर लंबी 1352 नालों की सफाई के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट तय किया था, ताकि पानी की निकासी सही तरीके से हो सके।