Lucknow में नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जे हटेंगे, मेयर ने 88 गांवों के रिकॉर्ड मांगे
Lucknow: लखनऊ नगर निगम की महापौर सुषमा खर्कवाल ने शहर की संपत्तियों को बचाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने नगर निगम की सीमा में शामिल 88 गांवों के जमीन रिकॉर्ड मांगे हैं और इन जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को तुरंत
Lucknow: लखनऊ नगर निगम की महापौर सुषमा खर्कवाल ने शहर की संपत्तियों को बचाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने नगर निगम की सीमा में शामिल 88 गांवों के जमीन रिकॉर्ड मांगे हैं और इन जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। संपत्ति विभाग की समीक्षा बैठक में मेयर ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब 9 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे अवैध निर्माण और नगर निकायों की मिलीभगत पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नगर निगम अदालती आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने का आदेश दिया है।
बता दें कि नवंबर 2019 में 88 गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था, जिससे निगम की सीमा में 258 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इन गांवों के अधिग्रहण के बाद ग्राम समाज की जमीनों पर बारात घर और सार्वजनिक शौचालय जैसी सुविधाएं बनाने की योजना थी। अक्टूबर 2023 में महापौर ने इन क्षेत्रों के विकास के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट भी प्रस्तावित किया था।
महापौर सुषमा खर्कवाल पहले भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला चुकी हैं। दिसंबर 2024 में पुलों के नीचे से कब्जा हटाने और जून 2025 में शहरव्यापी अभियान के निर्देश दिए गए थे। इससे पहले अगस्त 2025 में भी उन्होंने 212 ग्रामों की भूमि के विवरण पर रिपोर्ट मांगी थी।
इसी बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने अलीगंज अग्निकांड से जुड़ी व्यावसायिक इमारत पर सुनवाई पूरी कर ली है। इस इमारत के भविष्य और ध्वस्तीकरण को लेकर फैसला शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को आने की उम्मीद है।