Lucknow में मोहर्रम के लिए 3.10 लाख की मोम की जरीह तैयार, 186 साल पुरानी परंपरा का दिखेगा नजारा
Lucknow: राजधानी लखनऊ में मोहर्रम के मौके पर निकलने वाले शाही जुलूस की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार मोम और अभ्रक से बनी एक बेहद खास जरीह तैयार की जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत 3.10 लाख रुपये है। यह जरीह पहली मोहर्रम क
Lucknow: राजधानी लखनऊ में मोहर्रम के मौके पर निकलने वाले शाही जुलूस की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार मोम और अभ्रक से बनी एक बेहद खास जरीह तैयार की जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत 3.10 लाख रुपये है। यह जरीह पहली मोहर्रम को निकलने वाले पहले शाही जुलूस का मुख्य आकर्षण होगी।
इस मोम की जरीह को बनाने में काफी मेहनत लग रही है। यह 22 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी होगी, जिसमें डबल कैनोपी लगाई जाएगी। इसे बनाने के लिए करीब 1.45 क्विंटल मोम का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें 1000 महली, 1000 सितारे, 500 चांद, 1000 मिर्च-पत्ते और 4000 अलग-अलग तरह के फूल बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा इसमें चार छोटे गुंबद, एक बड़ा गुंबद, दो कैनोपी और हरे, लाल व सफेद रंग के आठ मोम के मीनार होंगे। बड़े गुंबद के ऊपर दो फीट का ताज होगा और ऊपर से गुलाब, कागज और कांच के सेहरे से इसे सजाया जाएगा।
सिर्फ मोम ही नहीं, बल्कि 17 फीट ऊंची और 8 फीट चौड़ी अभ्रक की जरीह, दो मेहदियां, 24 फुलवारियां और इमामबाड़ा शाह नजफ के लिए लाल और हरी जरीह भी तैयार की जा रही हैं। इस पूरे काम में नसीम अली समेत 16 कारीगर पिछले दो महीनों से दिन-रात जुटे हुए हैं। इनमें जारवल और बहराइच के कारीगर भी शामिल हैं।
मोहर्रम 2026 की शुरुआत मंगलवार, 16 जून से होने की उम्मीद है। परंपरा के मुताबिक, पहला शाही जुलूस बड़ा इमामबाड़ा से शाम करीब 5 बजे छोटा इमामबाड़ा की तरफ निकलेगा। यह 186 साल पुरानी परंपरा है, जिसकी शुरुआत 1838 में नवाब मोहम्मद अली शाह बहादुर ने की थी। जुलूस से पहले इमामबाड़ा परिसर में मौलाना मोहम्मद अली हैदर मजलिस को संबोधित करेंगे।
सुरक्षा के लिहाज से लखनऊ प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) बबलू कुमार ने 21 मई से 19 जुलाई 2026 तक धारा 163 (BNSS) लागू की है। इसके तहत 5 या उससे ज्यादा लोगों के जमा होने के लिए अनुमति लेना जरूरी है। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। संवेदनशील इलाकों में ट्रैक्टर, घोड़ा गाड़ी और ज्वलनशील सामान ले जाना मना है। साथ ही सरकारी दफ्तरों और मुख्यमंत्री आवास के पास ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह पाबंदी है।
यूपी पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी और जुलूस तय रास्तों से ही निकलेंगे। जुलूस में तलवार और भाले जैसे हथियार ले जाने पर रोक है। ताजियों की ऊंचाई भी तय मानकों के हिसाब से ही होगी। सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा के लिए लखनऊ में 2,000 पुलिसकर्मी, 14 PAC कंपनियां और दो अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं।