Lucknow में मुहर्रम पर गूंजीं ‘या हुसैन’ की सदाएं, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच निकले जुलूस

Lucknow: राजधानी लखनऊ में 26 जून 2026 को 10वीं मुहर्रम (आशुरा) का दिन पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। शहर के अलग-अलग हिस्सों में शिया और सुन्नी समुदायों ने मिलकर आलम, ताज़िया और जुलजनाह के जुलूस निकाले। इस दौरान फिजाओं में

Lucknow: राजधानी लखनऊ में 26 जून 2026 को 10वीं मुहर्रम (आशुरा) का दिन पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। शहर के अलग-अलग हिस्सों में शिया और सुन्नी समुदायों ने मिलकर आलम, ताज़िया और जुलजनाह के जुलूस निकाले। इस दौरान फिजाओं में ‘या हुसैन’ की सदाएं गूंजती रहीं और बड़ी संख्या में लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद किया।

प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुराने लखनऊ में सुबह 7 बजे से ही ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया था। मुख्य जुलूस सुबह 10 बजे इमामबाड़ा नजीम साहब से शुरू होकर दोपहर करीब 2:30 बजे कर्बला Talkatora पहुंचा। इसके अलावा महानगर और टेलिबाग इलाकों में भी ट्रैफिक रूट बदले गए थे। सुरक्षा के लिए पुलिस के साथ PAC और RAF के जवान तैनात रहे और पूरे रूट की निगरानी ड्रोन कैमरों और CCTV से की गई।

अधिकारियों ने साफ निर्देश दिए थे कि सभी जुलूस तय रास्तों और समय का पालन करें। बिना लाइसेंस के जुलूस निकालने और DJ बजाने पर पूरी तरह पाबंदी थी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीमें, एम्बुलेंस और फायर टेंडर अलर्ट पर रखे गए थे। मुहर्रम के मौके पर उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों और बैंकों में छुट्टी रही।

धार्मिक आयोजनों में अंजुमन अब्बासिया, अंजुमन गुंचाए मेहंदीया, अंजुमन शब्बेरिया और रौनक-ए-दीन-ए-इस्लाम जैसी संस्थाओं ने मुख्य भूमिका निभाई। मौलाना एस कलबे जावद नकवी ने शब-ए-आशूर पर मजलिस के जरिए धार्मिक संदेश दिए। वहीं राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए इमाम हुसैन के बलिदान को इंसानियत के लिए प्रेरणा बताया।

लखनऊ में माहौल शांतिपूर्ण रहा, लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों से कुछ दुखद खबरें आईं। अलीगंज में एक युवक की मौत हो गई जब ताज़िया हाई-टेंशन बिजली की तार से छू गया। प्रयागराज में एक जुलूस के दौरान मंदिर के चबूतरे को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई, जिसे पुलिस ने हस्तक्षेप कर ठीक कराया। वहीं गोंडा और बलरामपुर जैसे जिलों में मुहर्रम के जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।