Lucknow में निकला शाही जरी का जुलूस, ऊंट-घोड़ों के साथ उमड़ी भीड़; योगी सरकार ने जारी किए कड़े नियम
Lucknow: राजधानी लखनऊ में मोहर्रम के पहले दिन पारंपरिक शाही जरी का जुलूस पूरी अकीदत के साथ निकाला गया। बुधवार, 17 जून 2026 को शाम के समय निकले इस जुलूस में शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। हुसैनाबाद ट्रस्ट द
Lucknow: राजधानी लखनऊ में मोहर्रम के पहले दिन पारंपरिक शाही जरी का जुलूस पूरी अकीदत के साथ निकाला गया। बुधवार, 17 जून 2026 को शाम के समय निकले इस जुलूस में शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। हुसैनाबाद ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में काले कपड़े पहने लोग, ऊंटों पर बैठे बच्चे और झंडे लिए हुए कतारों ने शहर में एक अलग ही माहौल बना दिया।
इस ऐतिहासिक जुलूस की शुरुआत 1839 में अवध के नवाब मोहम्मद अली शाह ने की थी। इस बार भी परंपरा का पालन करते हुए हाथी, घोड़े और मातम की धुनें बजाने वाले बैंड शामिल हुए। नवाबी खानदान के सदस्य भी हुसैनाबाद ट्रस्ट के बैनर के साथ इस जुलूस का हिस्सा बने। सुरक्षा के लिहाज से रूमी गेट के नीचे के खंभों को पहले ही हटा दिया गया था ताकि हाथी और ऊंट बिना किसी रुकावट के गुजर सकें।
जुलूस के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त निर्देश दिए थे। सरकार ने साफ किया कि मोहर्रम शोक का मौका है, इसे शक्ति प्रदर्शन का जरिया नहीं बनाना चाहिए। प्रशासन ने हथियारों के प्रदर्शन और नए जुलूसों पर पूरी तरह रोक लगा दी। साथ ही, डीजे और ढोल-ताशों के इस्तेमाल के लिए तय मानक तय किए गए और ताजियों की ऊंचाई 10 से 12 फीट तक सीमित रखने को कहा गया।
ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी ने विशेष एडवाइजरी जारी की थी। पक्का पुल चौराहा, बड़ा इमामबाड़ा, रूमी गेट और घंटाघर जैसे इलाकों में रूट डायवर्जन लागू किया गया था। हालांकि एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता दिया गया। सुरक्षा के लिए लखनऊ पुलिस ने भारी बल तैनात किया, जिसमें 4 डीसीपी, 19 एडीसीपी और पीएसी की 14 कंपनियां शामिल थीं। पूरे इलाके की निगरानी सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से की गई।
धार्मिक नेताओं में मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली, मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी और मौलाना यासूब अब्बास ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासन ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों और शांति भंग करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब शहर में 26 जून को आशूरा मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं।