UP : लखनऊ के लोगों के लिए मेट्रो का सफर अब और सुरक्षित और आधुनिक होने जा रहा है। शहर में बनने वाले नए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में यात्रियों की सेफ्टी के लिए पहली बार प्लेटफार्म स्क्रीन डोर (PSD) तकनीक का इस्तेमाल होगा। चारबाग
UP : लखनऊ के लोगों के लिए मेट्रो का सफर अब और सुरक्षित और आधुनिक होने जा रहा है। शहर में बनने वाले नए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में यात्रियों की सेफ्टी के लिए पहली बार प्लेटफार्म स्क्रीन डोर (PSD) तकनीक का इस्तेमाल होगा। चारबाग से वसंत कुंज तक करीब 11.165 किलोमीटर लंबे इस रूट पर करीब 5,801 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
मेट्रो ट्रैक पर सुरक्षा के लिए क्या खास होगा
यात्रियों को ट्रैक पर जाने से रोकने के लिए प्लेटफार्म पर छह फीट ऊंची फाइबर ग्लास की सुरक्षा दीवार लगाई जाएगी। ये गेट तभी खुलेंगे जब ट्रेन प्लेटफार्म पर आकर पूरी तरह रुक जाएगी, जिससे हादसे का खतरा खत्म हो जाएगा। इसके अलावा, हर कोच में पैसेंजर इमरजेंसी इंटरकॉम सिस्टम होगा, जिससे मुसीबत के समय कंट्रोल रूम और ड्राइवर को तुरंत लाइव वीडियो मिल जाएगा।
बिना ड्राइवर की ट्रेनें और AI तकनीक का इस्तेमाल
इस नए कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ ट्रेनें पूरी तरह ड्राइवरलेस होंगी। ये ट्रेनें CBTC टेक्नोलॉजी के जरिए अपने आप चलेंगी, जिससे मानवीय गलतियों की गुंजाइश कम होगी। साथ ही, ट्रेनों के रखरखाव के लिए AI आधारित सिस्टम लगाया जाएगा, जो खराबी आने से पहले ही उसकी जानकारी दे देगा।
सफर को आरामदायक बनाने वाली अन्य सुविधाएं
- कोच के अंदर इंफोटेनमेंट स्क्रीन होंगी, जहाँ यात्री जरूरी जानकारी और लाइव स्ट्रीम देख सकेंगे।
- सेंसर आधारित एयर-कंडीशनिंग सिस्टम होगा, जो यात्रियों की भीड़ और CO2 लेवल के हिसाब से कूलिंग को अपने आप एडजस्ट करेगा।
- प्रोजेक्ट के लिए New Development Bank (NDB) से 2,883.93 करोड़ रुपये का लोन मिला है।
- UPMRC ने 15 आधुनिक ट्रेन सेट बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं, जिसकी आखिरी तारीख 16 जून 2026 है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ मेट्रो का नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर कहाँ से कहाँ तक होगा
यह नया कॉरिडोर चारबाग से वसंत कुंज तक बनेगा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 11.165 किलोमीटर होगी।
प्लेटफार्म स्क्रीन डोर (PSD) क्या है और यह क्यों जरूरी है
यह प्लेटफार्म और ट्रैक के बीच एक 6 फीट ऊंची फाइबर ग्लास की दीवार होती है। यह यात्रियों को ट्रैक पर गिरने या जाने से रोकती है और केवल ट्रेन आने पर ही खुलती है।