Lucknow में सीवेज के कचरे से बनेंगी ईंटें, मेयर सुषमा खर्कवाल ने दिल्ली के प्लांट का किया दौरा
UP/Lucknow: लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने शनिवार को दिल्ली का दौरा किया। उन्होंने वहां दिल्ली जल बोर्ड के स्लज मैनेजमेंट प्लांट को देखा। इस दौरे का मकसद यह समझना था कि कैसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले कचरे को र
UP/Lucknow: लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने शनिवार को दिल्ली का दौरा किया। उन्होंने वहां दिल्ली जल बोर्ड के स्लज मैनेजमेंट प्लांट को देखा। इस दौरे का मकसद यह समझना था कि कैसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले कचरे को रीसायकल करके मजबूत ईंटें बनाई जा सकती हैं। अब इसी आधुनिक तकनीक को लखनऊ में भी लागू करने की तैयारी चल रही है।
मेयर ने प्लांट में देखा कि एसटीपी से निकलने वाले स्लज (कीचड़नुमा कचरे) को मशीनरी के जरिए प्रोसेस किया जाता है, जिससे निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली ईंटें तैयार होती हैं। लखनऊ नगर निगम अब शहर में इस सिस्टम को लाने पर विचार कर रहा है ताकि कचरे का सही निपटारा हो सके और उससे कमाई भी की जा सके।
लखनऊ में कचरा प्रबंधन को लेकर पहले भी कई कदम उठाए गए हैं। जनवरी 2026 तक लखनऊ यूपी का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां हर दिन निकलने वाले सभी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा है। शिवरी में बने तीन प्लांटों में रोजाना 2,100 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा प्रोसेस किया जाता है। यहां गीले कचरे से खाद और बायोगैस बनाई जाती है, जबकि सूखे कचरे को रीसायकल कर सीमेंट और कागज फैक्ट्रियों के लिए ईंधन में बदला जाता है।
इसके अलावा, शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर मेयर का रुख काफी सख्त है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि सीवर संबंधी शिकायतों पर अगर 90 प्रतिशत लोगों को संतुष्टि नहीं मिली, तो जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गोमती नगर के भरवारा में 249 MLD क्षमता वाला नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया जाना है।
नगर निगम ने सितंबर 2025 में नए नियम भी पारित किए थे, जिसके तहत निजी सीवर टैंकों की सफाई के बाद गंदगी को खुले में फेंकने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। दिल्ली के इस मॉडल को अपनाने से लखनऊ में सीवेज कचरे की समस्या कम होगी और पर्यावरण को फायदा पहुंचेगा।