UP : लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने सरकारी खर्च और ईंधन की बचत के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। उन्होंने अपनी दो सरकारी गाड़ियों में से एक को वापस कर दिया है और नगर निगम के अन्य अधिकारियों के लिए भी कड़े निर्देश ज
UP : लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने सरकारी खर्च और ईंधन की बचत के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। उन्होंने अपनी दो सरकारी गाड़ियों में से एक को वापस कर दिया है और नगर निगम के अन्य अधिकारियों के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसाधनों के सही उपयोग की अपील के बाद लिया गया है।
सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर क्या हैं नए नियम?
महापौर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों के पास दो-दो सरकारी गाड़ियां हैं, उनमें से एक तुरंत वापस ली जाए। अब केवल उन्हीं अधिकारियों को सरकारी वाहन मिलेंगे जो इसके लिए पात्र हैं। साथ ही, अधिकारियों को डीजल और पेट्रोल के इस्तेमाल में कटौती करने को कहा गया है।
अधिकारियों के लिए लंच और टिफिन को लेकर निर्देश
ईंधन बचाने के उद्देश्य से महापौर ने अधिकारियों को दोपहर के भोजन के लिए घर न जाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि अधिकारी अब घर से टिफिन लेकर आएं ताकि गाड़ियों का अनावश्यक उपयोग कम हो। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया है कि शहर की साफ-सफाई और कूड़ा उठाने जैसे जरूरी कामों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा।
नगर निगम में डीजल की खपत और गाड़ियों का आंकड़ा
सुषमा खर्कवाल ने बताया कि लखनऊ नगर निगम में वर्तमान में अधिकारियों को करीब 60 गाड़ियां आवंटित हैं। इन वाहनों की वजह से निगम में रोजाना लगभग 8,000 लीटर डीजल की खपत होती है। इसी भारी खर्च को कम करने के लिए यह नया सिस्टम लागू किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
महापौर ने अधिकारियों को लंच के लिए क्या निर्देश दिया है?
महापौर ने निर्देश दिया है कि ईंधन बचाने के लिए अधिकारी दोपहर के भोजन के लिए घर न जाएं और अपने साथ टिफिन लेकर आएं।
नगर निगम में डीजल की कितनी खपत होती है?
नगर निगम में अधिकारियों को 60 गाड़ियां आवंटित हैं और इन वाहनों के कारण प्रतिदिन लगभग 8,000 लीटर डीजल खर्च होता है।