Lucknow में मेयर के खिलाफ भाजपा विधायकों और पार्षदों की बगावत, बजट आवंटन में पक्षपात का लगाया आरोप

Lucknow : लखनऊ नगर निगम में मेयर सुषमा खराकवल के खिलाफ अपनी ही पार्टी के पार्षदों और विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा पार्षदों का आरोप है कि विकास कार्यों के बजट में भारी भेदभाव किया जा रहा है और केवल पसंदीदा वार्डो

Lucknow : लखनऊ नगर निगम में मेयर सुषमा खराकवल के खिलाफ अपनी ही पार्टी के पार्षदों और विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा पार्षदों का आरोप है कि विकास कार्यों के बजट में भारी भेदभाव किया जा रहा है और केवल पसंदीदा वार्डों को ही फंड दिया जा रहा है। अब इस विवाद में भाजपा विधायक भी कूद पड़े हैं और उन्होंने मेयर को काम के हिसाब से बजट देने की नसीहत दी है।

विवाद की मुख्य वजह मई महीने में पास हुआ 68 करोड़ रुपये का बजट है। आरोप है कि इस बजट में करीब 45 भाजपा पार्षदों को कोई फंड नहीं मिला। पार्षदों का यह भी कहना है कि लखनऊ लोकसभा सीट, जो रक्षा मंत्री Rajnath Singh का क्षेत्र है, उसके मुकाबले मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र के वार्डों को ज्यादा पैसा दिया गया है। कुछ नेताओं ने इसे विकास के नाम पर घोटाला करार दिया है।

इस मामले को लेकर नाराज पार्षदों ने रक्षा मंत्री Rajnath Singh से शिकायत की है। वहीं, मेयर सुषमा खराकवल ने इन आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि किसी भी वार्ड को जीरो बजट नहीं दिया गया है और सभी वार्डों को करीब 2 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के पास विधायकों की तरह अलग से फंड नहीं होता है।

यह पहली बार नहीं है जब मेयर विवादों में घिरी हों। इससे पहले 21-22 मई 2026 को हाईकोर्ट ने मेयर की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां फ्रीज कर दी थीं। यह कार्रवाई एक निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ न दिलाने के कारण की गई थी। इसके बाद डीएम और म्युनिसिपल कमिश्नर को निगम का कामकाज संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी।

पार्टी ने इस कलह को रोकने के लिए 31 जुलाई 2026 को संगठन में फेरबदल किया था। विरोध करने वाले पार्षदों को अहम जिम्मेदारियां दी गईं, जिसमें देव शर्मा मिश्रा मुन्ना को डिप्टी लीडर और मुकेश सिंह मोंटी को चीफ व्हिप बनाया गया। हालांकि, इसके बावजूद पार्षदों और विधायकों की नाराजगी कम नहीं हुई है।