UP: लखनऊ नगर निगम की मेयर सुषमा खर्कवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार फ्रीज कर दिए हैं। यह बड़ा फैसला पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ न दिलाए जाने के मामल
UP: लखनऊ नगर निगम की मेयर सुषमा खर्कवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार फ्रीज कर दिए हैं। यह बड़ा फैसला पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ न दिलाए जाने के मामले में आया है। अब नगर निगम के कामों की कमान जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त संभालेंगे।
मेयर के अधिकार क्यों छीने गए?
वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से ललित किशोर तिवारी को 19 दिसंबर 2025 को पार्षद चुना गया था। हाईकोर्ट ने 12 मई 2026 को आदेश दिया था कि एक हफ्ते के भीतर उन्हें शपथ दिलाई जाए। इसके बावजूद शपथ नहीं दिलाई गई। मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया, लेकिन 20 मई 2026 को कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद 21 मई को हाईकोर्ट ने मेयर के अधिकार फ्रीज करने का कड़ा कदम उठाया।
अब नगर निगम का कामकाज कैसे चलेगा?
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब तक निर्वाचित पार्षद को गरिमापूर्ण तरीके से शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के पास कोई पावर नहीं रहेगी। अब लखनऊ नगर निगम के प्रशासनिक और फाइनेंसियल काम DM और नगर आयुक्त देखेंगे। याचिकाकर्ता के वकीलों ने यूपी नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 77 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि चुनाव के बाद शपथ रोकना गैर-कानूनी है।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
- 19 दिसंबर 2025: ललित किशोर तिवारी पार्षद निर्वाचित हुए।
- 12 मई 2026: हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में शपथ दिलाने का आदेश दिया।
- 20 मई 2026: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
- 21 मई 2026: हाईकोर्ट ने मेयर के अधिकार फ्रीज किए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मेयर सुषमा खर्कवाल के अधिकार क्यों फ्रीज हुए?
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद वार्ड-73 के निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई थी, जिसके कारण कोर्ट ने उनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार फ्रीज कर दिए।
अब लखनऊ नगर निगम का संचालन कौन करेगा?
कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब तक पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त निगम के कार्यों का संचालन करेंगे।