UP : लखनऊ के मलिहाबाद और कासमंडी इलाके में एक पुराने ढांचे को लेकर विवाद गहरा गया है. यहां पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच ऐतिहासिक पहचान और धार्मिक आस्था को लेकर बहस चल रही है. प्रशासन ने इलाके में तनाव को देखते हुए भा
UP : लखनऊ के मलिहाबाद और कासमंडी इलाके में एक पुराने ढांचे को लेकर विवाद गहरा गया है. यहां पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच ऐतिहासिक पहचान और धार्मिक आस्था को लेकर बहस चल रही है. प्रशासन ने इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया है ताकि शांति बनी रहे.
पासी समाज का क्या है दावा
पासी समाज का कहना है कि यह जगह 11वीं शताब्दी के महाराजा कंस पासी का ऐतिहासिक किला है. उनका दावा है कि यहां भगवान शिव का प्राचीन मंदिर था, जिसे बाद में बदलकर मस्जिद और मजार बना दिया गया. समाज के लोगों का आरोप है कि इस जगह का इस्लामीकरण किया जा रहा है और बाहर से भीड़ बुलाकर नमाज पढ़वाई जा रही है. अपने दावों के समर्थन में वे ब्रिटिश काल के लखनऊ जिला गजेटियर का हवाला दे रहे हैं.
कौन थे महाराजा कंस पासी
इतिहास के मुताबिक महाराजा कंस पासी 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच अवध क्षेत्र के एक शक्तिशाली शासक थे. उनके राज्य में मलिहाबाद, काकोरी, उन्नाव और हरदोई जैसे इलाके शामिल थे. गजेटियर के अनुसार उन्होंने विदेशी हमलावर सालार मसूद गाजी की सेना का मुकाबला किया था. स्थानीय लोग उन्हें एक वीर योद्धा के रूप में याद करते हैं जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों को पीछे हटने पर मजबूर किया था.
मौजूदा स्थिति और प्रशासन की कार्रवाई
22 मई 2026 को जुमे की नमाज के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने इलाके की बैरिकेडिंग की थी. कुछ पासी नेताओं को हाउस अरेस्ट भी किया गया था. मुस्लिम पक्ष इन सभी दावों को गलत बता रहा है और कहता है कि यह जगह पीढ़ियों से मस्जिद और मकबरा रही है. पासी समाज के नेता सूरज पासी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पुरातात्विक जांच की मांग की है. फिलहाल पुलिस स्थिति पर नजर रखे हुए है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
मलिहाबाद विवाद की मुख्य वजह क्या है?
यह विवाद कासमंडी इलाके में एक ढांचे को लेकर है. पासी समाज इसे महाराजा कंस पासी का किला और शिव मंदिर बता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे पुराना मकबरा और मस्जिद मानता है.
पासी समाज ने प्रशासन से क्या मांग की है?
पासी समाज के नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस स्थल का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने और पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके.