UP: लखनऊ और दिल्ली के बीच चलने वाली लखनऊ मेल आज भी यात्रियों की पहली पसंद बनी हुई है। हाई-स्पीड ट्रेनों के आने के बाद भी लोग इस ट्रेन पर भरोसा करते हैं। 103 साल पुरानी यह ट्रेन अपनी सादगी और सही समय के कारण लोगों के बीच
UP: लखनऊ और दिल्ली के बीच चलने वाली लखनऊ मेल आज भी यात्रियों की पहली पसंद बनी हुई है। हाई-स्पीड ट्रेनों के आने के बाद भी लोग इस ट्रेन पर भरोसा करते हैं। 103 साल पुरानी यह ट्रेन अपनी सादगी और सही समय के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय है।
लखनऊ मेल क्यों है इतनी खास?
इस ट्रेन का सबसे बड़ा फायदा इसका समय है। यह रात 10 बजे चारबाग स्टेशन से चलती है और सुबह 6:55 बजे नई दिल्ली पहुंच जाती है। यह ट्रेन प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्रों, मरीजों और कारोबारियों के लिए एक भरोसेमंद जरिया बन गई है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य दिनों में भी इसकी वेटिंग लिस्ट लंबी रहती है और त्योहारों पर टिकट मिलना मुश्किल होता है।
इतिहास और ट्रेन की खासियतें
लखनऊ मेल की शुरुआत 1923 में लखनऊ एक्सप्रेस के रूप में हुई थी। बाद में 1956 में इसका नाम बदलकर लखनऊ मेल किया गया। इसे गुणवत्ता के लिए आईएसओ 9000 प्रमाणन भी मिला है।
| विवरण |
जानकारी |
| ट्रेन संख्या |
12229/12230 |
| शुरुआत |
1923 (लखनऊ एक्सप्रेस के नाम से) |
| कोच का प्रकार |
जर्मन LHB (24 कोच) |
| दूरी और समय |
491 किमी, 8 घंटे 55 मिनट |
| प्रमुख ठहराव |
हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, हापुड़, गाजियाबाद |
यात्रियों का भावनात्मक जुड़ाव और बदलाव
यह ट्रेन केवल सफर का साधन नहीं बल्कि यादों का एक हिस्सा बन चुकी है। 2005-06 के बजट में इसे सुपरफास्ट श्रेणी में डाला गया था, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए इसके पुराने ठहराव वैसे ही रखे गए। 15 अगस्त 2024 से यह ट्रेन एक बार फिर चारबाग जंक्शन से संचालित होने लगी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ मेल ट्रेन का समय क्या है?
यह ट्रेन रात 10 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन से रवाना होती है और सुबह 6:55 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचती है।
लखनऊ मेल की शुरुआत कब हुई थी?
इसकी शुरुआत लगभग 103 साल पहले 1923 में लखनऊ एक्सप्रेस के नाम से हुई थी, जिसे 1956 में लखनऊ मेल नाम दिया गया।