UP : लखनऊ में आईटी सिटी और वेलनेस सिटी प्रोजेक्ट के पहले चरण में आने वाली जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भू-अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा-11 लागू की है। अब इन इलाकों में जिला कले
UP : लखनऊ में आईटी सिटी और वेलनेस सिटी प्रोजेक्ट के पहले चरण में आने वाली जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भू-अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा-11 लागू की है। अब इन इलाकों में जिला कलेक्टर की लिखित अनुमति के बिना कोई भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा सकेगा।
किन गांवों में रजिस्ट्री पर लगी रोक?
यह रोक कुल 17 गांवों में लगाई गई है। आईटी सिटी योजना के तहत मोहनलालगंज तहसील के बक्कास, सोनई कंजेहरा, सिकंदरपुर अमोलिया, सिद्धपुरा, परेहटा, पहाड़नगर टिकरिया, रकीबाबाद, मोहारी खुर्द, खुजौली और भटवारा गांव शामिल हैं। वहीं वेलनेस सिटी योजना में बक्कास, मलूकपुर ढकवा, चौरहिया, चौरासी, दुलारमऊ, नूरपुर बेहटा और मस्तेमऊ गांव आते हैं। निबंधन विभाग को सभी गाटा नंबर भेज दिए गए हैं ताकि कोई गलत रजिस्ट्री न हो सके।
LDA ने यह सख्त कदम क्यों उठाया?
LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि कुछ बड़े निवेशक और रियल एस्टेट कारोबारी कृषि भूमि खरीद रहे थे। इससे जमीन की कीमतों में कृत्रिम रूप से बढ़ोतरी हो रही थी और मूल भू-स्वामियों के हितों को नुकसान पहुँच रहा था। धारा-11 लागू होने से सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी और प्रोजेक्ट का विकास पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। अब केवल उन्हीं मूल भू-स्वामियों को लैंड पूलिंग का लाभ मिलेगा जिनका नाम सरकारी खतौनी में दर्ज है।
भू-स्वामियों के लिए क्या हैं नियम?
राज्य सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। प्रभावित भू-स्वामियों और स्थानीय निवासियों को अपनी आपत्तियां और सुझाव देने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। इन आपत्तियों पर जिला कलेक्टर सुनवाई करेंगे और फिर फैसला लेंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन खरीदने वाले नए लोगों को लैंड पूलिंग के तहत विकसित प्लॉट का लाभ नहीं मिलेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अब इन इलाकों में जमीन खरीदना पूरी तरह बंद है?
हाँ, जिला कलेक्टर की लिखित पूर्व अनुमति के बिना इन अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन खरीदना या बेचना अब पूरी तरह अवैध माना जाएगा।
लैंड पूलिंग का लाभ किसे मिलेगा?
लैंड पूलिंग का लाभ केवल उन मूल भू-स्वामियों को मिलेगा जिनका नाम वर्तमान सरकारी राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में दर्ज है।