Lucknow में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर LDA का बड़ा एक्शन, 126 संस्थान सील, कई होटलों को नोटिस
Lucknow: राजधानी लखनऊ में कॉमर्शियल इमारतों और दुकानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। अलीगंज में 22 जून 2026 को लगी भीषण आग, जिसमें 15 लोगों की जान गई थी, उसके बाद लखनऊ विकास प्र
Lucknow: राजधानी लखनऊ में कॉमर्शियल इमारतों और दुकानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। अलीगंज में 22 जून 2026 को लगी भीषण आग, जिसमें 15 लोगों की जान गई थी, उसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और यूपी सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में है। अब शहर के कोचिंग सेंटरों, होटलों और नर्सिंग होम की सघन जांच की जा रही है।
LDA ने पिछले दो दिनों के अभियान में अब तक 126 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है और 161 भवन मालिकों व मैनेजरों को नोटिस जारी किए हैं। इस कार्रवाई की जद में रिनैसेन्स (Renaissance), नोवोटेल (Novotel) और सैवी ग्रैंड (Savvy Grand) जैसे बड़े होटल भी आए हैं, जहाँ बेसमेंट में अवैध संचालन और अनियमितताएं पाई गई हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सरकार ने सुरक्षा को लेकर कई नए और कड़े नियम लागू किए हैं ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों। अब बिना फायर एनओसी (Fire NOC) के न तो नया बिजली कनेक्शन मिलेगा और न ही ट्रेड लाइसेंस जारी होगा। साथ ही, बेसमेंट में कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी चलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
| तारीख | की गई कार्रवाई / नया नियम |
|---|---|
| 23 जून 2026 | बेसमेंट में कोचिंग और कमर्शियल गतिविधियों पर बैन लगा |
| 24 जून 2026 | बिल्डिंग प्लान के लिए नोटराइज्ड फायर सेफ्टी हलफनामा अनिवार्य हुआ |
| 26 जून 2026 | बिजली कनेक्शन और ट्रेड लाइसेंस के लिए Fire NOC अनिवार्य किया गया |
| 27 जून 2026 | बड़े भवनों, मॉल और नर्सिंग होम के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य हुआ |
| 28 जून 2026 | इलेक्ट्रिकल सेफ्टी क्लीयरेंस को हर तीन साल में रिन्यू कराना जरूरी हुआ |
LDA सचिव विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभियान अगले तीन हफ्तों तक चलेगा। इसमें मुख्य रूप से स्वीकृत मैप, फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और क्षमता से अधिक भीड़ पर ध्यान दिया जा रहा है। SIT की रिपोर्ट के बाद अब फायर एनओसी की अनिवार्यता की ऊंचाई सीमा को 15 मीटर से घटाकर 12 मीटर करने पर विचार किया जा रहा है। ग्रीन बेल्ट की जमीन पर 200 वर्ग मीटर से ज्यादा के निर्माण को भी ढहाया जा सकता है।