Lucknow: LDA की जनता अदालत में पहुंचे परेशान लोग, 23 साल किस्त भरने के बाद भी नहीं मिला मकान का कब्जा

Lucknow: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के गोमती नगर कार्यालय में 18 जून को ‘जन संवाद’ यानी जनता अदालत लगाई गई। इस दौरान जमीन और कब्जे से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। सुबह 10 बजे से दोपहर 2

Lucknow: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के गोमती नगर कार्यालय में 18 जून को ‘जन संवाद’ यानी जनता अदालत लगाई गई। इस दौरान जमीन और कब्जे से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस कार्यक्रम में एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और सचिव विवेक श्रीवास्तव समेत कई बड़े अधिकारियों ने लोगों की शिकायतें सुनीं।

जनता अदालत में कुल 32 मामले सामने आए, जिनमें से अधिकारियों ने मौके पर ही 7 मामलों का निपटारा कर दिया। लेकिन कई शिकायतें ऐसी थीं जिन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। कुछ लोगों ने शिकायत की कि उन्होंने 46 साल पहले आवेदन शुल्क जमा किया था, जो अब तक वापस नहीं मिला। इसके जवाब में अधिकारियों ने उन्हें आज की कीमत के हिसाब से जमीन देने का प्रस्ताव दिया।

सबसे गंभीर मामला एक ऐसे व्यक्ति का था जिसने 23 साल तक किस्तों का भुगतान किया और रजिस्ट्री भी करा ली, लेकिन उसे अब तक अपने घर का कब्जा नहीं मिला। मेहरबान नाम के व्यक्ति ने बताया कि उनकी पत्नी सितारा बेगम के नाम शारदा नगर योजना रजनीखंड में 2001 में 330 वर्ग फुट का प्लॉट मिला था। उन्होंने 2024 तक करीब साढ़े तीन लाख रुपये जमा कर दिए और रजिस्ट्री भी करा ली, लेकिन कब्जा नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि उनकी जमीन पर एक प्राइवेट स्कूल चल रहा है और विभाग पुलिस बल न होने का कारण बता रहा है।

इसी तरह अमीनाबाद के जसविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि 2015 में उनकी और उनकी बहन की सहमति के बिना ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक प्लॉट ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि उस समय वे नाबालिग थे। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। वहीं रमेश कुमार उर्फ गुड्डू रावत ने बताया कि सीतापुर रोड योजना में उनकी जमीन के बदले जो चबूतरा मिला था, वह अब किसी और को दे दिया गया है। रमेश का कहना है कि वह चार बार जनता अदालत आ चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।