Lucknow में 10 हजार अवैध इमारतें, अलीगंज अग्निकांड के बाद LDA का बुलडोजर एक्शन शुरू

Lucknow: राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माणों का बड़ा खेल सामने आया है। अलीगंज में एक अवैध कॉमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग से 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन अब सख्त मोड में है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर में अवैध व्यावसा

Lucknow: राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माणों का बड़ा खेल सामने आया है। अलीगंज में एक अवैध कॉमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग से 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन अब सख्त मोड में है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है और कई इमारतों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी पूरी कर ली है।

हैरानी की बात यह है कि LDA ने दो साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में खुद हलफनामा देकर माना था कि लखनऊ में 10 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण दर्ज हैं। लेकिन इस बड़े आंकड़े के बावजूद कार्रवाई में ढिलाई रही, जिसका नतीजा अलीगंज अग्निकांड के रूप में सामने आया। इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने LDA उपाध्यक्ष को तलब किया और पूरी रिपोर्ट मांगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है।

अलीगंज हादसे के बाद LDA ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की है। 28 जून 2026 को पांच और इंजीनियरों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले 11 जून को एक सुपरवाइजर को रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड किया गया था। अलीगंज की जिस बहुमंजिला इमारत में आग लगी थी, वह असल में आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत थी, जिसे अवैध रूप से कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बदल दिया गया था। इस मामले में इमारत के मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला पुलिस हिरासत में हैं और उस बिल्डिंग पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने साफ किया है कि उन सभी बिल्डिंगों पर कार्रवाई होगी जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर व्यावसायिक काम किए जा रहे हैं। अभियान के तहत 24 जून से अवैध भवनों को सील किया जा रहा है। 27 जून को तीसरे दिन के अभियान में 10 अवैध कोचिंग सेंटरों को सील किया गया। नगर निगम की टीम भी अलीगंज के क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने और इलाके को सुरक्षित करने में जुटी है।

मुख्यमंत्री को सौंपी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक गोमतीनगर, आशियाना और कानपुर रोड जैसे इलाकों में 1043 आवासीय भूखंडों का इस्तेमाल बिजनेस के लिए हो रहा है। करीब दो हजार निर्माणों को गिराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन कई जगह काम अधूरा रहा। सरकारी आंकड़ों की मानें तो सिर्फ उत्तर प्रदेश में ऐसे 2,48,854 अवैध निर्माण हैं जिनके ध्वस्तीकरण के आदेश तो जारी हुए, पर अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हुई है।